डिजिटल अरेस्ट: ₹7 करोड़ की ठगी, एक अरेस्ट

Digital Arrest Fraud: लुधियाना के उद्योगपति एस.पी. ओसवाल से ₹7 करोड़ की ठगी, ED ने असम से महिला मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार

जालंधर/गुवाहाटी: लुधियाना के मशहूर उद्योगपति एस.पी. ओसवाल (S. P. Oswal) के साथ हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ और करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी सफलता हासिल की है। ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम समेत 5 राज्यों में 11 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान मनी लॉन्ड्रिंग की मुख्य आरोपी रूमी कलिता (Rumi Kalita) को गुवाहाटी से गिरफ्तार कर लिया गया है।

CBI अधिकारी बनकर की ₹7 करोड़ की ठगी

जांच में खुलासा हुआ कि जालसाजों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर एस.पी. ओसवाल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था। उन्होंने फर्जी अदालती और सरकारी दस्तावेजों का डर दिखाकर उनसे ₹7 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। हालांकि, त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस और एजेंसियों ने ₹5.24 करोड़ की राशि बरामद कर वापस दिला दी थी, लेकिन बाकी रकम को जालसाजों ने ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के जरिए ठिकाने लगा दिया।

कौन है रूमी कलिता और क्या था उसका रोल?

ED की जांच में सामने आया कि ठगी गई रकम को तुरंत लेयरिंग (Layering) के माध्यम से इधर-उधर करने में रूमी कलिता की मुख्य भूमिका थी।

  • वह लेबर और डिलीवरी बॉय के नाम पर खुले ‘म्यूल अकाउंट्स’ का संचालन करती थी।

  • ठगी गई रकम का एक निश्चित प्रतिशत हिस्सा उसे कमीशन के रूप में मिलता था।

  • छापेमारी के दौरान उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डाइवर्जन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

5 राज्यों में एक साथ छापेमारी

ED ने 22 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम में एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। इससे पहले 31 जनवरी 2025 को भी इस मामले में तलाशी ली गई थी।

10 दिन की ED रिमांड पर आरोपी

रूमी कलिता को 23 दिसंबर को PMLA के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। गुवाहाटी की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद, उसे जालंधर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को 2 जनवरी 2026 तक 10 दिनों की ED कस्टडी में भेज दिया है।

साइबर अपराध का बड़ा जाल

यह जांच लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद, इसी गिरोह द्वारा किए गए साइबर अपराध के 9 अन्य मामलों को भी इसी जांच में शामिल किया गया है। ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार और किन-किन अंतरराष्ट्रीय अपराधियों से जुड़े हैं।


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