धुरंधर 2: कहानी धांसू पर टाइमलाइन फेल
धुरंधर 2 रिव्यू: दमदार एक्शन के बीच टाइमलाइन की चूक! 🎬
स्पाई थ्रिलर का विस्तार और हमजा की कहानी
‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ की कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ पहली फिल्म खत्म हुई थी। रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) के अंत के बाद अब लियारी की सत्ता ‘हमजा’ (रणवीर सिंह) के हाथों में है। फिल्म फ्लैशबैक के जरिए जसकीरत सिंह रांगी के हमजा बनने के दर्दनाक सफर को बखूबी दिखाती है। 3 घंटे 4 मिनट की इस फिल्म में आदित्य धर ने भारत की नोटबंदी, उरी हमला, बाबरी विध्वंस और पाकिस्तान प्रायोजित साजिशों जैसे कई गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों को एक साथ पिरोने की कोशिश की है।

टाइमलाइन की बड़ी गड़बड़ियां: जो दर्शकों को खटकेंगी ⚖️
फिल्म की मेकिंग और विजुअल्स शानदार होने के बावजूद, आदित्य धर से कुछ ऐसी चूक हुई हैं जो कहानी के प्रवाह (Flow) को प्रभावित करती हैं:
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तेजी से भागती घटनाएं: फिल्म में बलूच आंदोलन से लेकर 2016 की नोटबंदी तक इतने सारे मुद्दों को शामिल किया गया है कि घटनाओं की टाइमलाइन बहुत तेजी से भागती महसूस होती है। कई महत्वपूर्ण मुद्दों को गहराई से दिखाने के बजाय उन्हें जल्दबाजी में पेश किया गया है, जिससे उनका प्रभाव कम हो जाता है।
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रिश्तों और उम्र का गणित: फिल्म में एक दृश्य है जहाँ हमजा अपने दोस्त से कहता है कि उसे आए हुए केवल 2 साल हुए हैं। मगर विरोधाभास यह है कि इसी अंतराल में हमजा की शादी यलीना (सारा अर्जुन) से हो चुकी है और उनका एक बच्चा भी है जो 3-4 साल का दिखाई देता है। यह गणित दर्शकों के गले नहीं उतरता।
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मुलाकात का अंतराल: आर. माधवन और रणवीर सिंह के किरदारों की मुलाकात को करीब 16 साल का बताया गया है, लेकिन फिल्म की बाकी घटनाओं के साथ यह समय काल (Timeframe) सही से मेल नहीं खाता।
रणवीर सिंह का ‘बीस्ट अवतार’ और निर्देशन 🔥
इन तकनीकी चूकों के बावजूद, रणवीर सिंह का अभिनय फिल्म की जान है। लियारी में उनकी हुकूमत और धांसू एक्शन सीक्वेंस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने लायक बनाते हैं। आदित्य धर ने एक बार फिर साबित किया है कि वे स्पाई थ्रिलर और वॉर ड्रामा के मास्टर हैं, लेकिन ‘धुरंधर 2’ के मामले में अधिक मुद्दों को समेटने की कोशिश ने कहानी की तार्किकता (Logic) को थोड़ा कमजोर कर दिया है।
निष्कर्ष: ‘धुरंधर 2’ एक विजुअल ट्रीट है, लेकिन अगर आप बारीकियों पर ध्यान देने वाले दर्शक हैं, तो इसकी उलझी हुई टाइमलाइन आपको जरूर खटकेगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

