इंदौर में दूषित पानी का कहर: 2800 बीमार
इंदौर के भागीरथपुरा में हाहाकार: दूषित पानी ने ली 2800 लोगों को चपेट में, 32 मरीज अभी भी ICU में जंग लड़ रहे
इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय भीषण स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। दूषित पानी (Contaminated Water) के कारण फैल रही बीमारियों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है। गुरुवार को संक्रमण के 338 नए मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। अब तक इस बीमारी से प्रभावित होने वालों का कुल आंकड़ा 2800 के पार पहुंच चुका है।
अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं, 32 की हालत गंभीर
भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में सुबह से लेकर देर रात तक मरीजों की कतारें लगी हुई हैं। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहा है।
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ICU में भर्ती मरीज: वर्तमान में 201 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जिनमें से 32 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है और वे आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं।
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डिस्चार्ज अपडेट: राहत की बात यह है कि अब तक 71 मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
घर-घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की 21 टीमें
हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। विभाग की 21 विशेष टीमें, जिनमें डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, ANM और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं, घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।
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मेगा सर्वे: गुरुवार को कुल 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई।
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कड़ी हिदायत: स्वास्थ्य अधिकारी लोगों को केवल उबला हुआ पानी पीने और बाहर का खाना पूरी तरह से नजरअंदाज करने की सलाह दे रहे हैं।
टैंकर के पानी से भी खौफ, RO पर निर्भर हुए रहवासी
क्षेत्र के कई घरों में स्थिति इतनी खराब है कि परिवार का हर सदस्य बीमार पड़ा है। हालांकि प्रशासन द्वारा पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, लेकिन दूषित पानी के डर से लोग टैंकर का इस्तेमाल करने से भी कतरा रहे हैं। लोग अब निजी तौर पर RO वाटर के कैन मंगवाने को मजबूर हैं।
जोन नंबर 5 में जल संकट की सबसे ज्यादा शिकायतें
भागीरथपुरा की इस त्रासदी के बाद नगर निगम के ‘इंदौर-311’ हेल्पलाइन पर शिकायतों की बाढ़ आ गई है।
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पिछले 24 घंटों में जल संबंधी 206 नई शिकायतें दर्ज की गई हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा शिकायतें जोन नंबर 5 से मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी अब इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन रहवासियों में प्रशासन की लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।
निष्कर्ष: इंदौर जैसे स्वच्छता में नंबर-1 शहर में दूषित पानी से इतनी बड़ी संख्या में लोगों का बीमार होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्राथमिकता बीमारी को रोकने और प्रभावितों को बेहतर इलाज देने की है।
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