बरेली में कांग्रेस का बड़ा दांव; मीरगंज, आंवला, कैंट और शहर सीट पर ठोका दावा, सपा के लिए बढ़ीं मुश्किलें

“बरेली में कांग्रेस के दावे से गठबंधन पर संकट: मीरगंज, आंवला, कैंट और शहर सीट मांगी; सपा के सामने बढ़ी सीट शेयरिंग की चुनौती”

विशेष राजनीतिक एवं चुनावी विश्लेषण (ऑल RIGHTs मैगजीन)

बरेली / लखनऊ: आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच बरेली जिले की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। कांग्रेस की स्थानीय इकाई ने जिले की चार प्रमुख विधानसभा सीटों—मीरगंज, आंवला, बरेली कैंट और बरेली शहर—पर अपने प्रत्याशी उतारने का लिखित प्रस्ताव प्रदेश नेतृत्व को भेजकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है।

Jagranकांग्रेस के इस आक्रामक रुख से समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में हलचल तेज हो गई है। ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तहत राज्य में चुनावी रणनीति बना रही सपा के लिए अब बरेली जिले में सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) और विपक्षी वोटों के संभावित बिखराव को रोकने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

1. 2022 के चुनावी समीकरण: क्यों महत्वपूर्ण हैं ये 4 सीटें?

हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में इन चारों सीटों पर कांग्रेस का वोट प्रतिशत काफी सीमित रहा था (2,280 से 5,288 मतों के बीच), लेकिन आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की छवि और गठबंधन का समीकरण पूरा खेल बदल सकता है:

  • बरेली कैंट सीट: 2022 में भाजपा के संजीव अग्रवाल (98,931 वोट) ने सपा की सुप्रिया ऐरन (88,163 वोट) को 10,768 मतों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद इस्लाम अंसारी को 2,280 वोट मिले थे, जो सपा की हार के अंतर से कम थे।

  • आंवला सीट: 2022 में भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मपाल सिंह (88,956 वोट) ने सपा के पंडित राधाकृष्ण शर्मा (70,532 वोट) को 18,424 वोटों से पराजित किया था। यहां कांग्रेस उम्मीदवार ओमवीर को 2,307 वोट मिले थे।

  • बरेली शहर सीट: भाजपा के डॉ. अरुण कुमार (1,29,014 वोट) ने सपा के राजेश अग्रवाल (96,694 वोट) को बड़े अंतर से हराया था, जबकि कांग्रेस के कृष्णकांत शर्मा को 2,311 वोट प्राप्त हुए थे।

2. सपा के सामने दोहरी चुनौती: गठबंधन या फ्रेंडली फाइट?

  • वोटों के बिखराव का खतरा: यदि कांग्रेस और सपा का गठबंधन इन सीटों पर सर्वसम्मति पर नहीं पहुंचता और फ्रेंडली फाइट की स्थिति बनती है, तो गैर-भाजपा मतों का विभाजन सीधा सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचा सकता है।

  • स्थानीय नेताओं का दबाव: सपा पिछले चुनावों में इन सीटों पर मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही है, इसलिए उसके स्थानीय नेता और पूर्व उम्मीदवार अपनी सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। वहीं, कांग्रेस अपने सांगठनिक पुनरुत्थान के लिए शहरी और अर्बन-रूरल बेल्ट की इन सीटों पर अड़ी हुई है।

‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: गठबंधन धर्म और जमीनी धरातल का संतुलन

बरेली मंडल में कांग्रेस का 4 सीटों पर दावा यह दर्शाता है कि पार्टी केवल जूनियर पार्टनर बनकर रहने के मूड में नहीं है, बल्कि अपनी पारंपरिक सीटों और शहरी जनाधार पर दोबारा पकड़ बनाना चाहती है। हालांकि, गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सपा और कांग्रेस दोनों ही दल व्यक्तिगत दावों से ऊपर उठकर ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की संभावना) को आधार मानकर फैसला लेते हैं या नहीं।

‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ उत्तर प्रदेश की राजनीति, चुनावी समीकरणों, सीट शेयरिंग और गठबंधन की पल-पल की हलचल को पूरी निष्पक्षता व गहराई के साथ अपने पाठकों तक पहुँचाती है।

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  1. क्या आप बरेली जिले की शेष 5 विधानसभा सीटों (जैसे बहेड़ी, नवाबगंज, फरीदपुर, बिठरी चैनपुर, मीरगंज) पर 2022 के विस्तृत चुनावी आंकड़े देखना चाहते हैं?

  2. क्या आप उत्तर प्रदेश में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रहे संभावित सीट-शेयरिंग फॉर्मूले की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट पढ़ना चाहते हैं?

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