मुख्य सचिव: बिहार विकास कार्यों में तेजी

बिहार में विकास की नई रफ्तार: तय हुई डेडलाइन

पटना: बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने राज्य की तीन बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नार्थ कोयल जलाशय, मंडई वीयर और ताजपुर-बख्तियारपुर ग्रीनफील्ड पथ बिहार की कृषि और कनेक्टिविटी के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे।


📌 न्यूज़ हाइलाइट्स:

  • कड़ा रुख: मुख्य सचिव ने सुस्त रफ्तार वाली परियोजनाओं पर औचक निरीक्षण की चेतावनी दी।

  • बड़ी राहत: ताजपुर-बख्तियारपुर कॉरिडोर से उत्तर-दक्षिण बिहार की दूरी 2 घंटे कम होगी।

  • सिंचाई का वरदान: नार्थ कोयल जलाशय से गया और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों को मिलेगा पानी।

  • डेडलाइन: परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट और अंतर-विभागीय समन्वय के निर्देश।


नार्थ कोयल जलाशय: सूखाग्रस्त क्षेत्रों की बुझेगी प्यास

दशकों पुरानी इस परियोजना को गया और औरंगाबाद के लिए वरदान बताते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि नहरों के नेटवर्क को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए तैयार किया जाए। गया जिलाधिकारी को 28 जनवरी तक ठोस प्रगति सुनिश्चित करने और कार्य बल (Workforce) बढ़ाने को कहा गया है।

ताजपुर-बख्तियारपुर पथ: 2 घंटे कम होगा सफर

51.2 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रणनीतिक महत्व पर चर्चा की गई। यह मार्ग समस्तीपुर को सीधे पटना से जोड़ेगा, जिससे वैशाली और समस्तीपुर के किसान अपने उत्पाद तेजी से राजधानी के बाजारों तक पहुँचा सकेंगे। मुख्य सचिव ने सड़क के किनारे औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और सघन पौधारोपण के भी निर्देश दिए।

मंडई वीयर: भू-जल स्तर में आएगा सुधार

मंडई वीयर की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह परियोजना जल संचयन और जहानाबाद क्षेत्र की पारंपरिक सिंचाई प्रणाली (आहर-पईन) के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि कार्यों में ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भू-अर्जन और भुगतान में न हो देरी

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि भू-अर्जन, वन विभाग की एनओसी और रैयतों (किसानों) को मुआवजे के भुगतान जैसे मामलों को तुरंत निपटाया जाए, ताकि काम की गति में कोई बाधा न आए।


रिपोर्टर: सोनू कुमार (पटना)


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