छत्तीसगढ़: 3 शराब कंपनियों पर ED का शिकंजा

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED का बड़ा एक्शन, 3 दिग्गज डिस्टिलरीज की ₹68 करोड़ की संपत्ति कुर्क; ‘करप्शन मॉडल’ का हुआ खुलासा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये के शराब घोटाले (Liquor Scam) की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर जोनल ऑफिस ने PMLA, 2002 के तहत राज्य की तीन प्रमुख डिस्टिलरीज की ₹68.16 करोड़ की संपत्तियों को प्रोविजनल तौर पर कुर्क (Attach) कर लिया है।

इस कार्रवाई के साथ ही इन तीनों डिस्टिलर्स की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्ति ₹96.55 करोड़ तक पहुंच गई है।

इन कंपनियों पर गिरा ED का चाबुक

ED की जांच के घेरे में छत्तीसगढ़ की ये तीन बड़ी शराब निर्माता कंपनियां हैं:

  1. मैसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड (CDL)

  2. मैसर्स भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (BWMPL)

  3. मैसर्स वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड (WDPL)

खुलासा: शराब घोटाले का ‘A, B, C’ मॉडल

ED की जांच में सामने आया है कि ये डिस्टिलरीज एक सोची-समझी साजिश के तहत तीन स्तरों पर भ्रष्टाचार कर रही थीं:

  • Part-A (लैंडिंग रेट में खेल): सिंडिकेट ने सरकार द्वारा शराब खरीद की दरें (Landing Rates) बढ़वा दीं। इसके बदले में डिस्टिलर्स ने प्रति केस ₹75 से ₹125 का अवैध कमीशन सिंडिकेट को वापस दिया।

  • Part-B (ऑफ-द-रिकॉर्ड बिक्री): यह सबसे बड़ा खेल था। डिस्टिलर्स ने नकली होलोग्राम और बोतलों का इस्तेमाल कर बिना हिसाब-किताब की शराब बनाई। इसे सरकारी दुकानों के जरिए बेचा गया, जिससे टैक्स की पूरी चोरी की गई। अप्रैल 2019 से जून 2022 के बीच लगभग 60.50 लाख केस ‘Part-B’ शराब सप्लाई की गई।

  • Part-C (एकाधिकार के लिए रिश्वत): डिस्टिलर्स ने बाजार में अपनी मोनोपॉली (एकाधिकार) बनाए रखने और फिक्स्ड शेयर पाने के लिए सिंडिकेट को मोटी सालाना रिश्वत दी।

₹2800 करोड़ की ‘काली कमाई’ और रसूखदारों पर शिकंजा

ACB/EOW की FIR के आधार पर शुरू हुई इस जांच ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है। ED के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया और ₹2800 करोड़ से अधिक का ‘Proceeds of Crime’ (अपराध की कमाई) पैदा किया।

अब तक गिरफ्तार और रडार पर मौजूद मुख्य नाम:

  • अनिल टुटेजा (Ex-IAS) और अनवर ढेबर (सिंडिकेट के कथित सरगना)

  • सौम्या चौरसिया (पूर्व सीएम कार्यालय में उप सचिव)

  • कवासी लखमा (विधायक और तत्कालीन आबकारी मंत्री)

  • चैतन्य बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र)

  • अरुण पति त्रिपाठी (ITS) और निरंजन दास (IAS)

अब तक की कुल कार्रवाई

ED इस मामले में अब तक ₹380 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस सिंडिकेट में हाई-रैंकिंग ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता और निजी संस्थाएं शामिल थीं, जिन्होंने मिलकर छत्तीसगढ़ के राजस्व को चूना लगाया।


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