रोहिंग्या शरणार्थी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’

म्यांमार(बर्मा)में रोहिंग्या समाज के लोगों के विरुद्ध चल रहे सैन्य एवं राज्य प्रायोजित नरसंहार के बाद बर्मा के रखाईन प्रांत

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राजनीति : राष्ट्र सेवा या व्यवसाय ?

कहने को तो राजनीति को समाज तथा राष्ट्रसेवा का माध्यम समझा जाता है। राजनीति में सक्रिय किसी भी व्यक्ति का

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अच्छे दिन आम लोगों के या सत्ता के चहेतों के?

आश्चर्य की बात यह है कि जब देश का कोई पत्रकार या लेखक अदानी,अंबानी बालकृष्ण, रामदेव, जय अमित शाह,अमित शाह

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अभिव्यक्ति की आज़ादी और जम्हूरियत के चौथे स्तंभ पर खूनी हमलों का दौर

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत पत्रकारिता के लिहाज से सबसे खतरनाक मुल्कों की सूची में बहुत ऊपर है. रिपोर्टर्स

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क्यों कर रहे हैं रमन सिंह हर सभा में अमित शाह का गुणगान?

आजकल छत्तीसगढ़ के सीएम डॉक्टर रमन सिंह बोनस तिहार में जगह-जगह जनसभाएं कर रहे हैं. वे जहां भी जा रहे

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विपक्ष से भयभीत सत्ता का अलोकतांत्रिक होना…

इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में देश में आपातकाल घोषित किए जाने जैसे तानाशाही कदम को कांग्रेस विरोधी दल आज तक

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झारखंड में सीएनटी-एसपीटीका मुद्दा : राज्यपाल ने लौटाया बिल

अकड़ और अहंकार, यह झारखंड के सीएम रघुवर दास की खबियों में शुमार है. पर यह उनकी अकड़ तब चित

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स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के दायरे में कब लाया जाएगा?

गोरखपुर के बीआरडी हॉस्पिटल में सात से ग्यारह अगस्त के बीच साठ बच्चे मर गए। इस झकझोर देने वाली घटना

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