कैंसर और बीपी की दवाएं 50% महंगी

कैंसर मरीज़ों पर सरकार की दोहरी मार, 50 फीसदी महंगी हुईं दवाएं; अन्य जीवन रक्षक औषधियों के भी बढ़े दाम

स्वास्थ्य एवं औषधि ब्यूरो: देश में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जेब पर एक बार फिर बड़ा आर्थिक बोझ बढ़ गया है। भारत में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख दवाओं कार्बोप्लेटिन (Carboplatin) और सिस्प्लाटिन (Cisplatin) इंजेक्शन की अधिकतम कीमतों में लगभग 50 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का तर्क है कि कच्चे माल यानी प्लैटिनम की वैश्विक आपूर्ति महंगी होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।

कहने को पिछले दिनों सरकार ने जीएसटी (GST) दर के आधार पर कैंसर की दवाओं को सस्ता करने का दावा किया था, लेकिन अब इनकी कीमतों में पहले से कहीं अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ी है।

कच्चे माल की कमी और प्लैटिनम की बढ़ती लागत बनी वजह

NPPA द्वारा 11 जून को जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, देश भर में इन जीवन रक्षक दवाओं की कमी को दूर करने और कच्चे माल (प्लैटिनम) की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों को संतुलित करने के लिए यह मूल्य वृद्धि की गई है। संशोधित कीमतें (लागू होने वाले टैक्स को छोड़कर) इस प्रकार हैं:

  • सिस्प्लाटिन (Cisplatin Injection): इसकी अधिकतम कीमत को ₹7.26 प्रति ml से बढ़ाकर अब ₹10.89 प्रति ml कर दिया गया है।

  • कार्बोप्लेटिन (Carboplatin Injection): इसकी अधिकतम कीमत को ₹60.49 प्रति ml से बढ़ाकर सीधा ₹90.74 प्रति ml तय किया गया है।

कैंसर ही नहीं, ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाएं भी हुईं महंगी

एक तरफ सरकार ने दवाओं की बढ़ती लागत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 39 नई दवा फॉर्मूलेशन के खुदरा मूल्य निर्धारित किए हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप (BP), मधुमेह (Sugar), एचआईवी (HIV), हृदय रोग और आंखों के संक्रमण की दवाएं शामिल हैं। लेकिन दूसरी तरफ, बाजार में आम मरीजों द्वारा रोज इस्तेमाल की जाने वाली जीवन रक्षक दवाओं के दाम तेजी से उछले हैं:

बीमारी / दवा का प्रकार पुराना दाम (₹) नया दाम (₹)
कैंसर संबंधी दवा (विशिष्ट) ₹2,500 ₹4,200
कैंसर संबंधी अन्य दवा ₹350 ₹550
हृदय संबंधी दवा (प्रति पत्ता) ₹666 ₹732
उच्च रक्तचाप (BP) की दवा (प्रति पत्ता) ₹346 ₹375
शुगर (मधुमेह) की दवा (प्रति पत्ता) ₹285 ₹313

कीमतों में हुए इस औचक इजाफे से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का स्वास्थ्य बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मरीज कल्याण संगठनों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर कीमतों को पुनर्गठित करने की मांग की है।


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