बिहार: पांडुलिपियों का होगा डिजिटल संरक्षण

ज्ञान भारतम् मिशन: पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए बिहार में बड़ी पहल

बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कला एवं संस्कृति विभाग ने ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ पर कार्य तेज कर दिया है। गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में सभी जिलाधिकारियों (DMs) के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।


मिशन मोड में होगा सर्वे और डिजिटलीकरण

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान और उनके संरक्षण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए।

  • समयसीमा: सभी जिलाधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सर्वे और डिजिटलीकरण का कार्य पूरा करने को कहा गया है।

  • समन्वय: मठ, मंदिर, विश्वविद्यालय, संग्रहालय और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’?

भारत सरकार ने वर्ष 2025–26 के बजट में इस मिशन की घोषणा की थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की विशाल ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करना है।

  • पांडुलिपि की परिभाषा: इस मिशन के तहत कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या धातु पर लिखी गई ऐसी हस्तलिखित प्रतियां शामिल हैं, जो कम से कम 75 वर्ष पुरानी हों।

  • संरक्षण की प्रक्रिया: इसमें प्राचीन ग्रंथों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग (सूचीकरण) और फिर उन्हें भविष्य के लिए डिजिटल रूप में सुरक्षित करना शामिल है।

बिहार में क्रियान्वयन की रणनीति

बिहार में बड़ी संख्या में प्राचीन ग्रंथ और लिपियां बिखरी हुई हैं। इन्हें सहेजने के लिए जिला स्तर पर विशेष कदम उठाए जा रहे हैं:

  1. समितियों का गठन: जिला स्तर पर समितियों के माध्यम से कार्यों की निगरानी होगी।

  2. सर्वेयरों की नियुक्ति: पांडुलिपियों की खोज और दस्तावेजीकरण के लिए विशेष सर्वेयर नियुक्त किए जा रहे हैं।

  3. जन-जागरूकता: लोगों को अपनी निजी विरासत (प्राचीन ग्रंथ) को साझा करने के लिए जागरूक किया जाएगा ताकि उन्हें वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जा सके।

महत्वपूर्ण उपस्थिति

इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, संग्रहालय निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों का मानना है कि इस मिशन से बिहार की प्राचीन विद्या और संस्कृति को वैश्विक पटल पर नई पहचान मिलेगी।


(रिपोर्ट: जया कुमारी, पटना)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)


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