बिहार: डेयरी को मिलेगी वैश्विक पहचान
बिहार की डेयरी को वैश्विक पहचान
बिहार के डेयरी उद्योग के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। मत्स्य, डेयरी एवं पशु संसाधन विभाग के डेयरी निदेशालय और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य बिहार के डेयरी उत्पादों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुँचाना और किसानों की आय को दोगुना करना है।

सात निश्चय के तहत डेयरी परिवर्तन
पशु संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह साझेदारी मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय’ योजना को सशक्त बनाएगी।
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वैश्विक बाजार: बिहार के दूध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए व्यवस्था तैयार की जा रही है।
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आय में वृद्धि: बाजार आधारित विकास और टिकाऊ फार्मिंग के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना मुख्य लक्ष्य है।

8,053 पंचायतों में खुलेंगे ‘सुधा केंद्र’
विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने परियोजना के विस्तार की रूपरेखा साझा की:
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सोसाइटी का गठन: राज्य के 24,248 गांवों में डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी बनाई जाएगी।
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सुधा केंद्र: बिहार की सभी 8,053 पंचायतों में ‘सुधा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे।
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पशु सहायक: तकनीकी सहायता के लिए हर पंचायत में पशु सहायकों की नियुक्ति होगी, जो डेयरी और मत्स्य पालन दोनों में मदद करेंगे।

बाजार का विस्तार: दिल्ली और यूपी तक पहुँच
बिहार का डेयरी नेटवर्क फिलहाल झारखंड और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित है, जिसे अब और व्यापक बनाया जाएगा।
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नया लक्ष्य: सुधा के उत्पादों को पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बड़े बाजारों तक पहुँचाया जाएगा।
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क्षमता वृद्धि: CII के सहयोग से डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और पशुओं के नस्ल सुधार (Breed Improvement) पर विशेष जोर दिया जाएगा।
CII की भूमिका
CII बिहार के उपाध्यक्ष अखिल कोछार के अनुसार, संस्था इस परियोजना में प्रोडक्ट मार्केटिंग और स्ट्रेटजी पार्टनर के रूप में काम करेगी। इससे बिहार के डेयरी उत्पादों की पहुँच पूरे भारत में सुनिश्चित हो सकेगी। कार्यक्रम में कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
(रिपोर्ट: सोनू कुमार पत्रकार, पटना)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

