बरेली। जिले में मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर हो रही बुल्डोजर कार्रवाई को लेकर अब माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।

बरेली। जिले में मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर हो रही बुल्डोजर कार्रवाई को लेकर अब माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बरेली इकाई ने इस मुद्दे पर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपते हुए प्रशासन पर गंभीर और सीधे आरोप लगाए हैं।

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान AIMIM के कई कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे। इसी दौरान पार्टी के सक्रिय नेता नदीम कुरैशी ने अपनी टीम के साथ खड़े होकर बड़ा और चुनौतीपूर्ण ऐलान कर दिया, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

AIMIM जिलाध्यक्ष असलम एडवोकेट का आरोप मुस्लिम समाज को निशाना बना रहा प्रशासन

ज्ञापन सौंपते हुए AIMIM जिलाध्यक्ष मोहम्मद असलम एडवोकेट ने कहा कि बरेली में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी संवैधानिक पदों पर रहते हुए भी मुस्लिम अल्पसंख्यक समाज को धार्मिक आधार पर लगातार परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के बुल्डोजर चलाया जा रहा है. नोटिस और सुनवाई के बिना मस्जिदें गिराई जा रही हैं जबकि दूसरी ओर जिले में कई अवैध मंदिर सड़क और सरकारी जमीन पर बने होने के बावजूद प्रशासन मौन है.

AIMIM ने इसे “धार्मिक भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन” बताया।

घंघोरा पिपरिया मस्जिद ध्वस्तीकरण बना विवाद का केंद्र AIMIM ने ज्ञापन में विशेष रूप से गांव घंघोरा पिपरिया की घटना का उल्लेख किया।

पार्टी का दावा है कि 07 फरवरी 2026 को प्रशासन ने बिना नोटिस और पूर्व सूचना के लगभग 50 वर्ष पुरानी मस्जिद को बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया।

पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मस्जिद वर्षों से गांव के मुस्लिम समाज की इबादत का केंद्र रही है और इसका मामला माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद में विचाराधीन है।

AIMIM का दावा है कि निचली अदालतों से मस्जिद के पक्ष में निर्णय आ चुका है मस्जिद कमेटी ने सभी दस्तावेज प्रशासन को दिखाए इसके बावजूद अधिकारियों ने कथित रूप से हाईकोर्ट आदेशों को मानने से इनकार कर दिया

नदीम कुरैशी का ऐलान“जुम्मे को वहीं पढ़ेंगे नमाज”

इसी मुद्दे पर AIMIM नेता नदीम कुरैशी ने बरेली कलेक्ट्रेट में अपनी टीम के साथ खड़े होकर बड़ा ऐलान किया।

**नदीम कुरैशी ने कहा “हम मौलाना तौकीर रज़ा की राह पर चलेंगे। आने वाले जुम्मे को घंघोरा पिपरिया मस्जिद स्थल पर नमाज अदा की जाएगी। प्रशासन चाहे जो कर ले, मुस्लिम समाज को इबादत से नहीं रोका जा सकता।”

नदीम कुरैशी के इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

AIMIM की राष्ट्रपति से प्रमुख मांगें

पार्टी ने राष्ट्रपति से निम्न मांगें की हैं

हाईकोर्ट में अपील के निस्तारण तक मुस्लिम समाज को नमाज और धार्मिक कार्य करने की अनुमति दी जाए बिना सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की गाइडलाइन का पालन किए बुल्डोजर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो

धार्मिक स्थलों पर एकतरफा कार्रवाई बंद की जाए

मुस्लिम समाज की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की जाए 3500 मुस्लिम आबादी, मस्जिद ही इबादत का एकमात्र स्थान AIMIM ने बताया कि गांव में मुस्लिम आबादी लगभग 3500 से अधिक है और यह मस्जिद ही इबादत का एकमात्र स्थान था।

रमजान से पहले इस कार्रवाई से समाज की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं और गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

बरेली में बढ़ता विवाद प्रशासन की अग्निपरीक्षा

अब AIMIM और नदीम कुरैशी के ऐलान के बाद आने वाला जुम्मा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सवाल यह है.

कि क्या मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति मिलेगी?

क्या प्रशासन अपनी कार्रवाई पर जवाब देगा?

क्या बुल्डोजर नीति पर रोक लगेगी?

अब फिलहाल पूरे जिले की निगाहें घंघोरा पिपरिया पर टिक गई हैं।

बरेली से रोहिताश कुमार भास्कर

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

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