बरेली: रुहेलखंड विवि में भारी हंगामा
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में गरमाई छात्र राजनीति: वीसी कार्यालय के बाहर सपा छात्रसभा का जोरदार प्रदर्शन
बरेली: महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) परिसर सोमवार को छात्र राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो गया। समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए परिसर में जमकर नारेबाजी की। ‘कुलपति लापता’ और ‘छात्रों का शोषण बंद करो’ जैसी तख्तियां लेकर छात्र वीसी कार्यालय के सामने ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
ज्ञापन देने पहुँचे थे छात्र, वीसी की गैरमौजूदगी पर भड़के
समाजवादी छात्रसभा के जिला अध्यक्ष अविनाश मिश्रा के नेतृत्व में भारी संख्या में कार्यकर्ता दोपहर करीब एक बजे अपनी मांगों के साथ कुलपति कार्यालय पहुँचे थे।
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आक्रोश की वजह: छात्रों का उद्देश्य विश्वविद्यालय की अनियमितताओं पर ज्ञापन सौंपना था, लेकिन कार्यालय में कुलपति के मौजूद न होने की जानकारी मिलते ही छात्र भड़क गए।
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धरना: आक्रोशित छात्र कार्यालय के बाहर ही जमीन पर बैठ गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को धरने में बदल दिया।
भ्रष्टाचार और छात्र शोषण के गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए और निम्नलिखित मुख्य समस्याएं गिनाईं:
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शिक्षक भर्ती में धांधली: हाल ही में हुई शिक्षकों की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए छात्रों ने इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
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आर्थिक बोझ: माइग्रेशन सर्टिफिकेट की फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी को छात्रों ने ‘आर्थिक शोषण’ करार दिया है।
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हॉस्टल की बदहाली: विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और अव्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।
कुलपति पर संवादहीनता का आरोप
जिला अध्यक्ष अविनाश मिश्रा ने सीधे तौर पर कुलपति प्रो. केपी सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुलपति न तो छात्रों से मिलते हैं और न ही उनके ज्ञापनों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।
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तनावपूर्ण स्थिति: कैंपस में काफी देर तक नारेबाजी और प्रदर्शन के कारण माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
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प्रशासन की चुप्पी: इस पूरे घटनाक्रम पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे छात्रों का असंतोष और अधिक बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी: छात्र नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों (विशेषकर शिक्षक भर्ती की जांच और फीस वृद्धि की वापसी) पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
बरेली से रोहिताश कुमार भास्कर
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

