बरेली: स्कूलों में फास्ट फूड पर रोक

Bareilly School News: बरेली के स्कूलों में ‘फास्ट फूड’ बैन, टिफिन में मैगी-पास्ता मिला तो सीधे अभिभावकों को जाएगा नोटिस

बरेली: बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए बरेली के निजी स्कूलों ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। जिले के कई प्रमुख विद्यालयों ने छात्रों के टिफिन में फास्ट फूड (Fast Food) लाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अब यदि कोई बच्चा टिफिन में जंक फूड लाता है, तो स्कूल प्रबंधन की ओर से सीधे अभिभावकों को नोटिस भेजा जा रहा है।

अमरोहा की घटना के बाद जागी स्कूल प्रबंधन की नींद

हाल ही में अमरोहा में फास्ट फूड के सेवन से एक बच्ची की कथित मृत्यु की हृदयविदारक घटना के बाद स्कूलों ने यह सख्ती बरती है। इस घटना ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच बच्चों की डाइट को लेकर गंभीर मंथन शुरू कर दिया है। स्कूल प्रबंधकों का मानना है कि सुबह 6 बजे पैक किया गया फास्ट फूड दोपहर 1 बजे तक न केवल अपनी पौष्टिकता खो देता है, बल्कि बच्चों के शरीर को अंदरूनी नुकसान भी पहुँचाता है।

नियमों का उल्लंघन करने पर डायरी में ‘नोटिस’

व्यास वर्ल्ड स्कूल के डायरेक्टर प्रीतपाल सिंह बग्गा के अनुसार, क्लास टीचर लंच के समय बच्चों के टिफिन की नियमित जांच कर रहे हैं। यदि किसी बच्चे के पास फास्ट फूड मिलता है, तो उसकी डायरी में लिखकर माता-पिता को सूचित किया जाता है और उन्हें स्वास्थ्यप्रद भोजन देने के लिए कहा जाता है।

शिक्षा अधिकारियों और प्रबंधकों की राय

  • डॉ. विनीता (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी): उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में पहले से ही पौष्टिक मध्याह्न भोजन दिया जा रहा है। शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर प्रयास करना होगा कि बच्चे फास्ट फूड से दूर रहें।

  • ममता सक्सेना (CBSE समन्वयक): उन्होंने अपील की है कि सभी सीबीएसई स्कूलों को फास्ट फूड पूरी तरह बैन करना चाहिए ताकि बच्चे घर का बना स्वस्थ भोजन ही खाएं।

  • राजेश जौली (प्रबंधक, GRM स्कूल): उन्होंने बताया कि स्कूलों में टीचर्स की विशेष ड्यूटी लगाई गई है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चे टिफिन का पौष्टिक भोजन पूरा खत्म करें।

कैंटीन पर भी नजर रखने की जरूरत

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला अध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने जोर देकर कहा कि केवल टिफिन ही नहीं, बल्कि स्कूलों के अंदर चल रहे फूड स्टॉल और कैंटीन में भी फास्ट फूड परोसना बंद होना चाहिए। उन्होंने भारतीय भोजन को पौष्टिक तत्वों का भंडार बताते हुए इसे अपनाने की सलाह दी है।

निष्कर्ष

बरेली के स्कूलों का यह अभियान न केवल बच्चों को मोटापे और पाचन संबंधी बीमारियों से बचाएगा, बल्कि उनमें स्वस्थ खान-पान की आदत भी विकसित करेगा। स्कूल प्रबंधन अब लगातार जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं।


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