बरेली: निजी अस्पतालों में भी मिलेगी ARV
बरेली में ‘डॉग बाइट’ के इलाज पर बड़ा फैसला: अब प्राइवेट अस्पतालों में भी मिलेगी एंटी-रेबीज वैक्सीन, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आदेश जारी
बरेली: आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक के बीच बरेली के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। अब कुत्ता या बंदर काटने पर मरीजों को केवल सरकारी अस्पतालों के भरोसे नहीं बैठना होगा। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कड़े रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी 500 निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और इम्युनोग्लोबिन (ARS) रखना अनिवार्य कर दिया है।
प्रशासन के इस कदम से समय पर इलाज न मिलने के कारण होने वाले गंभीर खतरों को कम किया जा सकेगा।
अब निजी अस्पतालों में भी होगा इलाज, लेकिन चुकाने होंगे पैसे
अभी तक रेबीज का टीका मुख्य रूप से सरकारी अस्पतालों और पीएचसी-सीएचसी में ही उपलब्ध था। कई बार रात के समय या छुट्टी के दिन सरकारी अस्पताल बंद होने से मरीजों को भटकना पड़ता था।
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अनिवार्यता: अब हर प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पताल को यह जीवन रक्षक वैक्सीन रखनी होगी।
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इलाज का खर्च: हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ये वैक्सीन मुफ्त देगी या नहीं। निजी अस्पतालों में वैक्सीन के पूरे कोर्स (5 टीके) के लिए मरीजों को 2500 से 3000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
बढ़ते मामले: बरेली में हर साल 1 लाख से ज्यादा लोग हो रहे शिकार
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बरेली में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है:
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2023: 1,00,613 मामले
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2024: 1,10,895 मामले
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2025 (नवंबर तक): 1,14,996 मामले
इन बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए निजी अस्पतालों की भागीदारी को बेहद जरूरी माना जा रहा है। अब प्राइवेट अस्पतालों को भी अपने यहाँ आने वाले मामलों की रिपोर्टिंग सीएमओ (CMO) कार्यालय को नियमित रूप से करनी होगी।
ARV के साथ ARS भी है जरूरी: डॉक्टर की सलाह
IMA अध्यक्ष डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि लोग अक्सर जानकारी के अभाव में सिर्फ एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) ही लगवाते हैं।
“अगर जानवर के काटने पर खून निकला है, तो संक्रमण को तुरंत रोकने के लिए इम्युनोग्लोबिन (ARS) लगवाना अनिवार्य है। यह सीरम खून में पहुंचे संक्रमण को तत्काल खत्म करने में मदद करता है।”
प्रशासन की तैयारी: तैनात होंगे नोडल अधिकारी
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि जिले के करीब 500 निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। पारदर्शिता के लिए हर अस्पताल में एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा, जो रोजाना आने वाले केस की जानकारी शासन को भेजेगा। इससे जिले में रेबीज के वास्तविक खतरों का सही डेटा मिल सकेगा।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से बरेली के स्वास्थ्य ढांचे में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अब आपातकालीन स्थिति में मरीज को घर के पास ही इलाज मिल सकेगा, जिससे रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव आसान होगा।
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