Baeilly News : बहेड़ी में अवैध अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भरमार, स्वास्थ्य विभाग लाचार,,
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बरेली। बहेड़ी क्षेत्र में अवैध अस्पतालों और बिना मान्यता चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका भयावह उदाहरण शुक्रवार को सामने आया, जब कथित गलत ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसन अस्पताल को सील कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का दावा तो किया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह अस्पताल अब तक किसकी निगरानी में चल रहा था?परिजनों के मुताबिक महिला को सामान्य उपचार के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरती गई।
हालत बिगड़ने पर सही समय पर न तो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराए गए और न ही समुचित आपात व्यवस्था थी। देखते ही देखते महिला ने दम तोड़ दिया और परिवार में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गलत इलाज और.गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। जांच में पंजीकरण, डॉक्टरों की उपलब्धता, उपकरणों और अन्य मानकों को लेकर कई सवाल खड़े हुए.आनन-फानन में यूनिसन अस्पताल को सील कर दिया गया।
लेकिन क्षेत्र के लोग पूछ रहे हैं कि यदि अनियमितताएं थीं तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभाग को पहले इसकी जानकारी नहीं थी या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा था?बहेड़ी में यह कोई पहला मामला नहीं है।
कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों छोटे-बड़े नर्सिंग होम, अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर खुलेआम संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, न प्रशिक्षित स्टाफ और न ही मानक उपकरण। इसके बावजूद सर्जरी तक की जा रही है।
गंभीर मरीजों को पहले भर्ती कर मोटी रकम वसूली जाती है और हालत बिगड़ने पर बरेली या अन्य शहरों के बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही हैपीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कड़े नियम होने के बावजूद निगरानी ढीली है।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन कार्रवाई अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है। छापेमारी होती है, नोटिस जारी होते हैं, फिर कुछ दिन बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।यूनिसन अस्पताल पर ताला लगना केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
यदि समय-समय पर सख्त निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद एक महिला की जान बचाई जा सकती थी। अब प्रशासन जांच की बात कर रहा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दे रहा है, लेकिन जनता जवाब चाहती है—क्या यह कार्रवाई स्थायी सुधार की शुरुआत है या फिर कुछ दिन की हलचल के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?बहेड़ी की जनता की मांग है कि क्षेत्र में संचालित सभी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की व्यापक जांच हो, अवैध रूप से चल रहे संस्थानों को स्थायी रूप से बंद किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। क्योंकि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे अस्पताल मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे और स्वास्थ्य विभाग की लाचारी पर सवाल उठते
रिपोर्ट: रोहिताश कुमार भास्कर,
बरेली,
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )
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