ऑस्ट्रेलिया: लाल आसमान से मचा हड़कंप
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ‘प्रलय’ जैसा मंजर: गहरा लाल हुआ आसमान, जानें इसके पीछे का विज्ञान
पर्थ: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से आई एक हैरान करने वाली तस्वीर और वीडियो ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दृश्यों में दिन के उजाले की जगह आसमान में गहरा लाल रंग छाया हुआ नजर आ रहा है, जिसे देख लोग इसकी तुलना ‘दुनिया के अंत’ या किसी हॉलीवुड फिल्म के डरावने भविष्य से कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ‘दूसरी दुनिया’ जैसा अहसास
AccuWeather द्वारा साझा किए गए वीडियो में आसमान की डरावनी लाल चमक साफ देखी जा सकती है।
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जनता की प्रतिक्रिया: इंटरनेट यूजर्स ने इसे “किसी दूसरी दुनिया का दृश्य” बताया। कई लोग इसे प्रलय का संकेत मानकर डर गए, तो कुछ ने इसे प्रकृति का अद्भुत करिश्मा करार दिया।
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दृश्यता: धूल की इतनी घनी परत थी कि सूरज की सामान्य रोशनी पूरी तरह गायब हो गई और चारों ओर केवल लाल रंग का साम्राज्य दिखाई दिया।
क्यों लाल हुआ आसमान? (वैज्ञानिक कारण)
हालांकि यह दृश्य डरावना लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे एक विशुद्ध भौतिक घटना है, जिसे ‘प्रकाश का प्रकीर्णन’ (Light Scattering) कहा जाता है।
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तरंगदैर्ध्य (Wavelength) का खेल: सूर्य का प्रकाश विभिन्न रंगों की तरंगदैर्ध्य से बना होता है। सामान्यतः छोटी तरंगदैर्ध्य वाली नीली किरणें बिखरती हैं, जिससे आसमान नीला दिखता है।
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धूल के कणों का प्रभाव: जब वातावरण में धूल या लोहे के अंश वाले बड़े कणों की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, तो वे छोटी तरंगदैर्ध्य वाली किरणों को सोख लेते हैं या पूरी तरह बिखेर देते हैं। ऐसे में केवल लंबी तरंगदैर्ध्य वाली लाल और नारंगी किरणें ही हमारी आंखों तक पहुँच पाती हैं।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की मिट्टी और चक्रवात का असर
इस विशिष्ट घटना के पीछे चक्रवात नरेल (Cyclone Narelle) और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का बड़ा हाथ माना जा रहा है:
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लोहे से भरपूर मिट्टी: पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की मिट्टी में आयरन (लोहे) की मात्रा बहुत अधिक है।
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चक्रवाती हवाएं: चक्रवात से जुड़ी शक्तिशाली हवाओं ने जमीन से भारी मात्रा में लाल धूल उड़ाकर आसमान में एक मोटी परत बना दी।
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फिल्टर इफेक्ट: जब सूरज की रोशनी धूल की इस लोहे युक्त मोटी परत से गुजरी, तो बाकी सारे रंग छन गए और केवल गहरा लाल रंग ही दिखाई देने लगा।
ऑस्ट्रेलिया के शुष्क इलाकों में धूल के तूफान सामान्य हैं, लेकिन मिट्टी में मौजूद लोहे के अंश और मौसम की विशेष प्रणाली ने इस बार के नजारे को असाधारण और ऐतिहासिक बना दिया है।

