असम: शराब घोटाले में ED की कार्रवाई
असम-अरुणाचल शराब तस्करी व ₹1,047 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग: ED ने संजय दीवान, नीरज शर्मा समेत 19 पर दाखिल की प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट
विशेष राष्ट्रीय एवं अपराध ब्यूरो: गुवाहाटी (असम)
प्रवर्तन निदेशालय (ED), गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी बड़े पैमाने पर अवैध शराब निर्माण, अंतरराज्यीय तस्करी और ₹1,047 करोड़ से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत मुख्य आरोपियों संजय दीवान, नीरज शर्मा, राजन लोहिया, शंकर देब और समीर मेहता तथा उनसे जुड़ी 14 बॉन्डेड वेयरहाउस संस्थाओं समेत कुल 19 आरोपियों के खिलाफ प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल कर दी है।
173 FIRs के आधार पर शुरू हुई थी जांच; 2.63 लाख लीटर शराब जब्त
यह मामला असम पुलिस द्वारा असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के जिलों में दर्ज की गई 173 एफआईआर (FIRs) के आधार पर शुरू किया गया था:
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कर चोरी के लिए अवैध तस्करी: अरुणाचल प्रदेश में निर्मित शराब पर केवल “For sale in Arunachal Pradesh” के लेबल होते थे। इसे बिना किसी वैलिड ट्रांजिट परमिट या एक्साइज़ वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट (EVC) के असम में स्मगल किया जाता था, ताकि असम के भारी एक्साइज़ ड्यूटी और वैट (VAT) की चोरी की जा सके।
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करोड़ों की जब्ती: असम आबकारी अधिकारियों ने जनवरी 2023 से अप्रैल 2026 के बीच 739 अलग-अलग घटनाओं में 2.63 लाख बल्क लीटर से अधिक शराब जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹52.77 करोड़ है।
स्थानीय निवासियों को बनाया ‘डमी’ लाइसेंस होल्डर
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी संजय दीवान, नीरज शर्मा और राजन लोहिया ने अरुणाचल प्रदेश के शराब व्यापार पर एकाधिकार जमा रखा था:
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फर्जी समझौते और डमी डायरेक्टर्स: आबकारी नीतियों का उल्लंघन कर स्थानीय आदिवासियों के नाम पर जारी वैधानिक लाइसेंसों को आरोपियों ने अनधिकृत समझौतों के जरिए अपने नियंत्रण में ले लिया। स्थानीय लाइसेंस धारकों को केवल छोटा मासिक मानदेय देकर कागजों तक सीमित रखा गया।
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ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर: कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कम वेतन वाले कर्मचारियों को ‘डमी डायरेक्टर’ बनाकर बिठाया गया, जिनका काम केवल आदेश मानना और खाली चेक पर दस्तखत करना था।
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सरप्लस शराब का निर्माण: निर्माण इकाइयों में बिना टैक्स चुकाए तय क्षमता से अधिक शराब बनाकर बड़े पैमाने पर स्मगलिंग के लिए अवैध स्टॉक तैयार किया जाता था।
4-स्तरीय मनी लॉन्ड्रिंग: हवाला और कोडिंग का खेल
तस्करी से अर्जित अथाह नकद काली कमाई (Proceeds of Crime) को वित्तीय प्रणाली में शामिल करने के लिए 4-स्तरीय सिस्टम तैयार किया गया था:
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हवाला और स्ट्रक्चरिंग: गुवाहाटी, दिल्ली, रांची और हैदराबाद जैसे शहरों से नकद राशि को हवाला नेटवर्क के जरिए अरुणाचल प्रदेश भेजा जाता था। बैंक जांच से बचने के लिए ₹2 लाख से कम के हजारों बिल बनाए जाते थे और ₹10 लाख की रिपोर्टिंग सीमा से ठीक नीचे बैंक जमा (Structuring) किए जाते थे। 9 होलसेल इकाइयों के खातों में लगभग ₹1,047.93 करोड़ नकद जमा कराए गए।
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लेयरिंग व इंटीग्रेशन: इस रकम को 14 बॉन्डेड वेयरहाउस और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से घुमाते हुए अंततः “प्रॉफिट शेयर” और वैध आय के रूप में आरोपियों और उनके HUF खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
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हवाला कोड वर्ड्स: फोरेंसिक जांच में मोबाइल डिवाइस से गुप्त कोड मिले, जहां लाखों रुपये के लेन-देन के लिए “Books”, “Box”, “KG”, “Bag” जैसे शब्दों और करेंसी नोटों के सीरियल नंबरों का उपयोग वेरिफिकेशन टोकन के रूप में किया जाता था।
₹26.59 करोड़ के बैंक खाते व एफडी फ्रीज
छापेमारी के दौरान ईडी ने ₹52.10 लाख की अघोषित नकदी जब्त की है। इसके अलावा विभिन्न वित्तीय संस्थानों में जमा ₹26.59 करोड़ की बैंक राशि और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को PMLA के तहत फ्रीज कर दिया गया है, जिसकी पुष्टि नई दिल्ली स्थित एडज्यूडिकेटिंग अथॉरिटी ने भी कर दी है।
आयकर विभाग की पिछली जांच में भी मुख्य आरोपियों ने भारी अघोषित आय की बात स्वीकार की थी। फिलहाल इस पूरे सिंडिकेट पर ईडी की आगे की जांच जारी है।
राष्ट्रीय एवं अपराध ब्यूरो: गुवाहाटी
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

