UPI चार्जेस विवाद पर अशनीर ग्रोवर का बड़ा खुलासा

“डिजिटल क्रांति पर ‘मोदी टैक्स’?”: UPI चार्जेस पर सियासी घमासान और अशनीर ग्रोवर के दावों से गर्माया माहौल

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी डिजिटल उपलब्धि और आम जनता की दैनिक जीवनरेखा बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की हालिया सरकारी अधिसूचना के बाद देश भर में सियासी और आर्थिक गलियारों में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने इसे “मोदी टैक्स” और जनता पर अतिरिक्त डिजिटल बोझ करार दिया है, वहीं फिनटेक जगत के जाने-माने चेहरे अशनीर ग्रोवर ने आंकड़ों के जरिए सरकार के इस कदम की पोल खोल दी है।

अशनीर ग्रोवर ने आंकड़े खोलकर दिखाई सच्चाई: “यह सर्विस चार्ज नहीं, नया टैक्स है”

भारतपे (BharatPe) के पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का यह तर्क पूरी तरह बेबुनियाद है कि UPI इकोसिस्टम घाटे में चल रहा है या उसे सब्सिडी की जरूरत है। ग्रोवर ने सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तीन मुख्य बिंदु रखे:

  1. बैंकिंग और NPCI का भारी मुनाफा:

    • RBI: केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर कर चुका है।

    • लिस्टेड बैंक: देश के प्रमुख बैंकों ने कुल 4.11 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है।

    • NPCI (UPI की मूल संस्था): खुद 1,888 करोड़ रुपये के प्री-टैक्स सरप्लस में बैठी है।

  2. ATM का खर्च बचाओ, UPI को मत छांटो: ग्रोवर ने कहा कि भारत में कैश हैंडलिंग और ATM नेटवर्क चलाने पर सालाना 30,500 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर सरकार को लागत बचानी है तो वह Cash Network कम करे, न कि देश की सबसे वैज्ञानिक उपलब्धि (UPI) पर नया टैक्स लादे।

विपक्ष का हमला: “अमेरिकी दबाव में सरेंडर और व्यापारियों के जरिए जेब काटने की तैयारी”

विपक्षी नेताओं ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार को घेरा है:

  • राहुल गांधी का आरोप: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विदेशी (अमेरिकी) पेमेंट कंपनियों के लंबे समय से चले आ रहे दबाव के आगे झुककर मोदी सरकार ने जीरो-एमडीआर (Zero-MDR) नीति को खत्म करने की राह खोली है।

  • ग्राहकों की जेब पर अप्रत्यक्ष मार: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार भले ही दावा करे कि यह चार्ज दुकानदारों (Merchants) पर है, लेकिन व्यावहारिक रूप से कोई भी दुकानदार अपनी जेब से 0.4% नहीं देगा। अंततः व्यापारी सामान के दाम बढ़ाकर यह बोझ आम उपभोक्ता (Consumer) की जेब पर ही डालेंगे।

सरकार की सफाई: “95% आम उपभोक्ता रहेंगे पूरी तरह अप्रभावित”

बढ़ते विवाद के बीच वित्त मंत्रालय और एनपीसीआई (NPCI) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है:

  1. P2P ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने (P2P) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।

  2. 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट्स फ्री: 2,000 रुपये तक की दैनिक खरीदारी पर MDR शून्य (Zero) रहेगा, जो कि कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शंस का 95% से अधिक हिस्सा है।

  3. छोटे दुकानदारों को राहत: 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक का यूपीआई QR से पेमेंट लेने वाले छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ का मानना है कि डिजिटल इंडिया की अभूतपूर्व सफलता का मुख्य आधार इसका ‘फ्री और पारदर्शी’ होना रहा है। यदि मर्चेंट चार्जेस के बहाने अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता या छोटे कारोबारियों पर वित्तीय दबाव आता है, तो इससे देश के कैशलेस इकोनॉमी के अभियान को झटका लग सकता है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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