नक्सलवाद पर एक्शन: BJP का विपक्ष पर हमला
‘शहरी नक्सलवाद’ और सुरक्षा नीतियों पर BJP का आक्रामक रुख: विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल
नई दिल्ली – देश में आंतरिक सुरक्षा और विकास की गति को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नीतियों की सराहना करते हुए दावा किया है कि ठोस विकास रणनीतियों और कड़े सुरक्षा कदमों के कारण देश में नक्सलवाद तथा ‘वैचारिक अराजकता’ (Urban Naxalism) जैसी चुनौतियां लगातार कमजोर हो रही हैं।
वहीं, भाजपा ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम आदमी पार्टी (AAP) पर अवसरवादी राजनीति करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दों पर ढुलमुल रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
विकास और आंतरिक सुरक्षा पर सरकार का दावा
भाजपा नेताओं और गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में अपनाई गई रणनीतियों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
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नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में ‘रेड कॉरिडोर’ का दायरा तेजी से सिमटा है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: प्रभावित आदिवासी इलाकों में सड़कें, मोबाइल टावर, बैंक और सरकारी योजनाओं की 100% पहुंच सुनिश्चित कर युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
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सरेंडर नीति: हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर पुनर्वास नीतियां लागू की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में कैडर्स ने हथियार डाले हैं।
विपक्ष पर ‘राष्ट्रविरोधी नैरेटिव’ का आरोप
सत्तारूढ़ दल का कहना है कि जहां एक तरफ देश सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर आगे बढ़ रहा है, वहीं विपक्षी दल सत्ता की होड़ में सुरक्षा बलों के अभियानों पर सवाल उठाते हैं।
भाजपा का आरोप है कि विपक्षी गठबंधन के घटक दल वैचारिक रूप से उग्रवादी तत्वों और ‘शहरी नक्सलियों’ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण प्रदान करते हैं, जिससे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। हालांकि, विपक्षी दल इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का पलटवार करते रहे हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

