दिल्ली पुलिस के जाफराबाद थाने के अंतर्गत कानून की धज्जियां किस कदर उड़ रही हैं,
दिल्ली पुलिस के जाफराबाद थाने के अंतर्गत कानून की धज्जियां किस कदर उड़ रही हैं, इसकी बानोगी देखनी हो तो मधुपान मोहल्ला के इस कारनामे को देखिए जहाँ खाकी अब सुरक्षा का पर्याय नहीं बल्कि एक ‘वसूली सिंडिकेट’ बन चुकी है। थाना जाफराबाद के बीट अफ़सर हवलदार राकेश कुमार का मोहल्ले के एक खास वर्ग और शिकायतों के सौदागरों से प्रेम कुछ ऐसा परवान चढ़ा है कि वे रात के नौ-दस बजे तो क्या, सीधे रात के एक बजे पीड़ित के घर धमक जाते हैं और बाद में व्हाट्सएप चैट के सबूतों को ‘डिलीट फॉर एवरीवन’ कर अपनी कारगुजारियों पर पर्दा डालते हैं। हद तो तब हो जाती है जब POCSO जैसे गंभीर मामलों और खौफ का मनोवैज्ञानिक आतंक पैदा कर ₹35,000 की खुली अवैध उगाही कर ली जाती है। यही नहीं, 23 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब सवा आठ बजे ट्रैफिक पुलिस के दो नुमाइंदे अपनी सीमा लांघकर तंग गलियों में जा धमकते हैं, गाड़ी के फोटो खींचते हैं और खुलेआम धमकी देते हैं कि गाड़ी उठवा देंगे या बीस हजार रुपये दे दो, क्योंकि कानून की जानकारी न होना इस परिवार का सबसे बड़ा ‘अपराध’ बन गया है। सीसीटीवी फुटेज में ट्रैफिक पुलिस की गली के भीतर यह संदिग्ध मार्चिंग और फोटो सेशन इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि पुलिस महकमे का एक धड़ा किस हद तक व्यक्तिगत रंजिश और उगाही में उतर आया है। इस पूरे उत्पीड़न, डिजिटल साक्ष्यों, डिलीटेड चैट्स और अवैध वसूली के पुख्ता सबूतों के साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम और अन्य संगीन धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है, और आने वाले दिनों में RTI के माध्यम से एक-एक दस्तावेज, ड्यूटी रोस्टर और मूवमेंट रजिस्टर की ऐसी चीरफाड़ होगी कि महकमे को जवाब देते नहीं बनेगा। न्याय और सत्य की इस लड़ाई में कानून के इन रखवालों के चेहरे बेनकाब करने के लिए यह विधिक शिकंजा अब रुकने वाला नहीं है!
