कर्नाटक में SIR के बीच चुनाव आयोग का खेल
कर्नाटक में SIR के बीच चुनाव आयोग का खेल
वोटर लिस्ट से किसी का नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भरना होता है।
फॉर्म में नाम काटने की वजह भरनी जरूरी होती है, जैसे: वोटर की मौत हो गई, वोटर शिफ्ट हो गया या उसका नाम दो बार है.. यानी- बिना वजह बताए नाम नहीं काटा जा सकता।
लेकिन…SIR के दौरान खुद अधिकारियों ने 61 हजार से ज्यादा Form-7 भरे इनमें से एक भी आवेदन में नाम हटाने की वजह नहीं लिखी गई
जब अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ये फॉर्म सिस्टम ने ऑटो-जेनरेट किए और जब वोटर सुनवाई में नहीं पहुंचे तो सिस्टम ने उनके डिजिटल साइन लगाकर वोटर्स को ineligible मार्क कर दिया।
इस मामले में अजीब बात यह है कि 👇
⦿ जब Claims और objection दर्ज कराने की डेडलाइन 23 सितंबर तक थी, तब अधिकारियों ने सिर्फ 192 फॉर्म भरे
⦿ मगर डेडलाइन के बाद 60,800 से ज्यादा फॉर्म भरे गए
⦿ Claims और objection के निपटारे के आखिरी दिन यानी 22 अक्टूबर के दिन 10,000 से ज्यादा फॉर्म भरे गए
ये दिखाता है कि कैसे चुनाव आयोग SIR के दौरान नियम-कानून की धज्जियां उड़ाकर लोगों से वोट का अधिकार छीन रहा है।
साफ है- चुनाव आयोग को हाइजैक कर, मोदी-ज्ञानेश जमकर ‘वोट चोरी’ कर रहे हैं।
लेकिन गद्दार ज्ञानू और उसके आका याद रखें कि कोई ‘वोट चोर’ बचेगा नहीं, सबका हिसाब होगा।
