क्या खत्म होगा ईरान युद्ध? बड़ी रिपोर्ट
ईरान-अमेरिका युद्ध: 45 दिन के सीजफायर पर टिकी दुनिया की नजरें
नई दिल्ली/दुबई: मिडिल ईस्ट में पिछले 37 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी उम्मीद की किरण नजर आ रही है। एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 45 दिनों के संभावित सीजफायर (युद्धविराम) को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसे युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
📌 न्यूज़ हाइलाइट्स:
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दो चरणों वाला प्लान: पहले 45 दिन का अस्थायी सीजफायर, फिर स्थायी शांति पर चर्चा।
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प्रमुख मध्यस्थ: पाकिस्तान, मिस्र (Egypt) और तुर्किये इस समझौते को अमली जामा पहनाने में जुटे हैं।
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ट्रंप की डेडलाइन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार शाम तक की डेडलाइन दी है, जिससे बातचीत में तेजी आई है।
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बड़ा मुद्दा: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना और यूरेनियम संवर्धन पर रोक मुख्य शर्तें।
क्या है 45 दिन का ‘शांति फॉर्मूला’?
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यस्थ देश एक टू-फेज (दो चरणीय) डील पर काम कर रहे हैं।
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पहला चरण: 45 दिनों के लिए युद्ध को पूरी तरह रोका जाएगा। इस दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे।
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दूसरा चरण: इस शांति काल का उपयोग स्थायी समाधान निकालने, कैदियों की अदला-बदली और व्यापारिक मार्गों (जैसे होर्मुज की खाड़ी) को बहाल करने के लिए किया जाएगा।
पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये की बड़ी भूमिका
इस पूरी वार्ता में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये ‘ब्रिज’ का काम कर रहे हैं। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच संदेशों का आदान-प्रदान इन्हीं देशों के जरिए हो रहा है। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल ‘अस्थायी’ राहत नहीं, बल्कि भविष्य में हमलों से सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहता है।
तनाव और उम्मीद के बीच की घड़ी
जहाँ एक ओर सीजफायर की चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले का प्लान ‘रेडी’ रखा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो परिणाम गंभीर होंगे। टाटा ग्रुप जैसी वैश्विक कंपनियां भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अपने 30 CEOs को ‘बैकअप प्लान’ के साथ तैयार रहने को कहा है।
वैश्विक बाजार पर असर
सीजफायर की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई है। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि 45 दिन की यह डील फाइनल होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

