US का ईरान पर घातक बंकर-बस्टर हमला
अमेरिका का प्रहार: ईरान पर गिराया ‘बंकर-बस्टर’ GBU-72, 200 फीट गहरी मार 💣
इतिहास में पहली बार GBU-72 का युद्धक इस्तेमाल
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने उस वक्त बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया जब यूएस सेंट्रल कमांड ने ईरान के मजबूत सैन्य ठिकानों पर अपने दूसरे सबसे शक्तिशाली बम GBU-72 (गाइडेड बॉम्ब यूनिट-72) का इस्तेमाल किया। 17 मार्च को हुई इस कार्रवाई की पुष्टि सैन्य अधिकारियों ने की है। यह पहला मौका है जब इस अत्याधुनिक ‘बंकर-बस्टर’ हथियार का उपयोग किसी वास्तविक युद्ध क्षेत्र में किया गया है।
क्या है GBU-72 और इसकी मारक क्षमता? ⚖️
रिटायर्ड एयर फोर्स लेफ्टिनेंट जनरल मार्क वेदरिंगटन के अनुसार, ये 5,000 पाउंड के डीप पेनेट्रेटर गोला-बारूद थे, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी तटरेखा पर स्थित मिसाइल साइटों पर गिराया गया। इसकी विशेषताएं इसे दुनिया का घातक हथियार बनाती हैं:
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गहरी पैठ: यह बम जमीन की सतह से 200 फीट नीचे दबे कंक्रीट और स्टील के बंकरों को तबाह करने की क्षमता रखता है।
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ड्रिलिंग इफेक्ट: इसका सख्त स्टील खोल मिट्टी और चट्टानों को किसी ड्रिल मशीन की तरह चीरते हुए अंदर घुस जाता है।
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स्मार्ट फ्यूज: इसमें ‘हार्ड टारगेट स्मार्ट फ्यूज’ लगा है, जो लक्ष्य की एक निश्चित गहराई पर पहुँचने के बाद ही फटता है।
कैसे काम करता है यह ‘मौत का गोला’? 🚀
हथियार विशेषज्ञों के अनुसार, GBU-72 बिना इंजन के भी अत्यधिक गति प्राप्त कर लेता है क्योंकि इसे बहुत ऊंचाई से गिराया जाता है।
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होल-मेकिंग प्रभाव: जब एक के बाद एक कई बम गिराए जाते हैं, तो हर अगला बम पहले के बनाए रास्ते का फायदा उठाकर और भी गहराई तक प्रवेश करता है।
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न्यूनतम बाहरी नुकसान: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जमीन के ऊपर कम से कम नुकसान करते हुए केवल अंडरग्राउंड कमांड सेंटर, परमाणु सुविधाओं और मिसाइल साइट्स को निशाना बनाता है।
विशेषज्ञों की राय 🔍
थिंक टैंक ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज’ के रयान ब्रॉब्स्ट ने बताया कि इन बमों में अक्सर विस्फोटक पेलोड कम होता है, लेकिन इनकी असली ताकत इनका वजन, गति और अभेद्य केसिंग है, जो इन्हें पाताल में छिपे लक्ष्यों के लिए काल बना देती है।
मुख्य जानकारी:
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वजन: 5,000 पाउंड (एडवांस्ड 5K पेनिट्रेटर)।
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लक्ष्य: होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी मिसाइल साइट्स।
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क्षमता: 200 फीट भूमिगत भेदन।
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महत्व: युद्ध में इस हथियार का वैश्विक स्तर पर पहला सफल प्रयोग।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

