UP Politics: योगी मंत्रिमंडल में बदलाव
UP Politics: योगी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी! ‘मकर संक्रांति’ के बाद बदलेगा सरकार और संगठन का चेहरा, 2027 पर नजर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई भाजपा कोर कमेटी की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि मकर संक्रांति के बाद योगी मंत्रिमंडल (Yogi Cabinet Expansion) में विस्तार और फेरबदल हो सकता है। इस बार भाजपा ‘सरकार और संगठन’ के बीच चेहरों की अदला-बदली का बड़ा दांव खेलने जा रही है।
कोर कमेटी की बैठक: 2027 का ‘विजय रथ’ तैयार करने की रणनीति
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब डेढ़ घंटे चली बैठक को मिशन 2027 के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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कौन-कौन रहा मौजूद: दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह।
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RSS की भूमिका: बैठक से पहले प्रदेश अध्यक्ष ने आरएसएस कार्यालय ‘भारती भवन’ जाकर संघ के पदाधिकारियों से भी चर्चा की, जिससे साफ है कि बदलाव में वैचारिक और क्षेत्रीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
‘अदला-बदली’ का फॉर्मूला: कौन अंदर, कौन बाहर?
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार ‘स्वैपिंग फॉर्मूला’ अपना सकती है।
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संगठन से सरकार में: कुछ अनुभवी संगठन के नेताओं को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की सरकार में वापसी की प्रबल संभावना है।
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सरकार से संगठन में: खराब रिपोर्ट कार्ड वाले या संगठन में बेहतर पकड़ रखने वाले मंत्रियों को पार्टी की मुख्य धारा में भेजा जा सकता है।
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प्रमोशन: अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।
6 सीटों की गुंजाइश और जातीय समीकरण
वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम सीमा 60 है।
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खाली पद: जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान वाल्मीकि के सांसद बनने के बाद से उनकी जगह खाली है।
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क्षेत्रीय संतुलन: चर्चा है कि फिलहाल मंत्रिमंडल में पूर्वांचल का वर्चस्व ज्यादा है, जिसे संतुलित करने के लिए इस बार पश्चिमी यूपी के नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
दिल्ली से ‘हरी झंडी’ का इंतजार
कोर कमेटी की बैठक के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दिल्ली रवाना हो गए हैं। वे वहां हाईकमान (अमित शाह और जेपी नड्डा) को बैठक की रिपोर्ट सौंपेंगे। दिल्ली से अंतिम मुहर लगते ही नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख तय हो जाएगी।
मुख्य बिंदु:
विभागीय प्रदर्शन और प्रशासनिक रिपोर्ट (SIR) के आधार पर तय होंगे मंत्रियों के नाम।
आयोगों और बोर्डों में खाली पड़े पदों को भी जल्द भरने पर बनी सहमति।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए ‘जातीय और क्षेत्रीय’ संतुलन साधने पर जोर।
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