UP News : लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की
उत्तर प्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यन के बीच राजधानी लखनऊ स्थित संघ कार्यालय में तकरीबन 40 मिनट तक बंद कमरे में महत्वपूर्ण बैठक हुई। जानकारी में पता चला है कि इस मुलाकात में कोई तीसरा व्यक व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिसने अब राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक मंथन का बेहद महत्वपूर्ण दौर माना जा रहा है। इन सब के बीच सबसे विशेष बात यह है कि 25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर कार्यक्रम के दौरान भी दोनों नेताओं की एक अलग बैठक हुई थी। इतने कम वक़्त में दो विस्तृत मुलाकातें यह संकेत दे रही हैं कि संघ और बीजेपी नेतृत्व आने वाले चुनावी रणनीति को लेकर बेहद गंभीर है।
2027 में ‘योगी’ बनेंगे भाजपा का चेहरा?
जानकारी के मुताबिक, बैठक में सबसे बड़ा संदेश यह सामने आ रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का चेहरा योगी आदित्यनाथ ही होंगे। पार्टी और संघ के शीर्ष स्तर पर इस बात को लेकर किसी तरह की ‘किंतु-परंतु’ की स्थिति नहीं है। बीजेपी अपने तीसरे कार्यकाल के लिए योगी के नेतृत्व में ही जनता से जनादेश मांगेगी।
देखा जाये… बीते कुछ वक़्त से राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेजी से चल रही थी कि क्या 2027 में बीजेपी कोई नया चेहरा सामने ला सकती है या संगठन में बदलाव की बड़ी तैयारी है। लेकिन इस बैठक के बाद इन अटकलों पर विराम लगने के संकेत मिल रहे हैं।
गुटबाजी पर निर्णायक कार्रवाई के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बीजेपी के अंदर चल रही गुटबाजी और अलग-अलग नैरेटिव गढ़ने के तमाम प्रयासों पर भी चर्चा सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बीजेपी के अंदर चल रही गुटबाजी और अलग-अलग नैरेटिव गढ़ने के तमाम प्रयासों पर भी चर्चा हुई। तय किया गया है कि पार्टी के अंदर अनुशासन को सख्ती से लागू किया जाएगा और जो भी नेता निजी हित में भ्रम फैलाने का प्रयास करेंगे, उन पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखना बीजेपी की सबसे बड़ी ‘प्राथमिकता’ होगी। ऐसे में संघ का साफ़ समर्थन योगी के नेतृत्व को और मजबूत करने का काम कर रहा है।
वैचारिक लाइन पर भी मुहर!
बैठक में योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक कार्यशैली और उनके राष्ट्रवादी व सनातन आधारित संदेशों पर भी चर्चा हुई।
सूत्रों का कहना है कि संघ नेतृत्व ने योगी की वैचारिक प्रतिबद्धता और ‘एकजुट हिंदू समाज’ के संदेश को सकारात्मक रूप से देखा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी हाल के भाषणों में हिंदू समाज की एकता और जातिगत विभाजन से ऊपर उठने की बात करते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि योगी की राजनीतिक लाइन और संघ के वैचारिक दृष्टिकोण में सामंजस्य को लेकर भी सहमति बनी है।
संगठन में बदलाव की तैयारी
बैठक में यह भी तय हो चुका है कि संगठन में लंबित पदाधिकारियों की नियुक्ति जल्द पूरी की जाए। चुनाव में अब एक साल से भी कम का वक़्त बचा है, ऐसे में नतीजे देने वाली टीम को समय रहते मैदान में उतारने पर जोर दिया गया है। ऐसे भी संकेत मिल रहे हैं कि होली के तत्काल बाद ही प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए पदाधिकारियों को कम से कम 8-10 महीने का वक़्त देने की रणनीति है, ताकि वे जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत कर सकें।
मंत्रिमंडल विस्तार भी जल्द?
योगी मंत्रिमंडल में खाली पड़े पदों को भरने पर भी बैठक में चर्चा होने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा। नए मंत्रियों को विभाग समझने और काम दिखाने का पर्याप्त समय देने के लिए जल्द निर्णय लिया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले बदलाव करने से कई बार नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सरकार और संगठन दोनों में वक़्त रहते संतुलित बदलाव की रणनीति बनाई जा रही है।
साल 2017 से अब तक संघ का समर्थन
यह भी याद दिलाया जा रहा है कि साल 2017 में जब योगी आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब भी संघ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई थी। तब से लेकर अब तक योगी निरंतर बीजेपी के प्रभावशाली चेहरा बने हुए हैं और साल 2022 में एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर चुके हैं।
अब इस ताजा मुलाकात को इसी क्रम में देखा जा रहा है, जहां संघ ने एक बार फिर साफ संकेत देने का प्रयास किया है कि वह योगी के साथ खड़ा है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक यह संदेश पहुंचाने की मंशा बताई जा रही है कि नेतृत्व को लेकर किसी तरह की असमंजस की स्थिति नहीं है।
अब आगे क्या?
अब सभी की निगाहें इस बात पर है कि संगठन में परिवर्तन और मंत्रिमंडल विस्तार कब तक होता है। अगर होली के बाद इन निर्णयों पर अमल होता है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि 2027 के ‘महासमर’ की तैयारी आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है।
फिलहाल, हालातों को देखते हुए इतना तो तय माना जा रह है कि योगी-भागवत की इस 40 मिनट की बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगाने का काम किया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी महीनों में इसकी गूंज और स्पष्ट रूप से सुनाई दे सकती है।
(ब्यूरो रिपोर्ट ऑल राइट्स मैगज़ीन)
