लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक पर अतिक्रमण का दोहराता खेल, वीडियो और तस्वीरों में दिखी जमीनी हकीकत
नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित सुभाष चौक पर अतिक्रमण की समस्या केवल शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हाल ही में सामने आए एक वीडियो में इसकी जमीनी हकीकत साफ दिखाई देती है। करीब एक मिनट से अधिक के इस वीडियो में नालियों के ऊपर डाले गए स्लैब, उन पर खड़ी दुकानें और आसपास जमा कूड़ा स्पष्ट नजर आता है।
वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि जिन नालियों को जल निकासी के लिए बनाया गया था, वे कई जगहों पर पूरी तरह ढकी हुई हैं। स्लैब के ऊपर अस्थायी ढांचे और दुकानों का संचालन हो रहा है। कुछ हिस्सों में गीला कूड़ा और प्लास्टिक जमा दिखाई देता है, जिससे साफ समझ आता है कि नियमित सफाई संभव नहीं हो पा रही। सड़क का हिस्सा भी संकरा होता नजर आता है, जिससे यातायात प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद हैं। कुछ लोग इसे आजीविका से जोड़कर देखते हैं, जबकि अन्य नागरिक इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक निगरानी पर खड़ा हो रहा है। यदि अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित निरीक्षण और सख्त निगरानी हो, तो दोबारा निर्माण कैसे संभव हो जाता है? क्या संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की गई है?
क्या दिल्ली का यही हाल रहने वाला है? क्या राजधानी के अन्य इलाकों में भी इसी तरह नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जे का सिलसिला जारी है? यदि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाए और कुछ दिनों बाद स्थिति फिर वैसी ही हो जाए, तो यह शहरी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में जल निकासी तंत्र को अवरुद्ध करना सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है। नालियों में कूड़ा जमा रहने से डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, अवैध निर्माण से सड़कें संकरी होती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है और आपातकालीन सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग केवल एक बार की कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए। नियमित मॉनिटरिंग, सख्त जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना समय की मांग है। जब तक अतिक्रमण दोबारा करने वालों के खिलाफ प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्या जड़ से खत्म होती नहीं दिखती।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या सुभाष चौक की स्थिति सुधरेगी और नालियों को अतिक्रमण से मुक्त रखा जाएगा, या फिर यह मामला भी अन्य शहरी समस्याओं की तरह फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट,
आल राइट्स मैगज़ीन
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