लोकतंत्र की असली ताकत- जागरूक नागरिक, सशक्त राष्ट्र

सम्पादकीय:

लोकतंत्र को सामान्य शब्दों में कहें तो “जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए” शासन।
इस प्रणाली में जनता सर्वोच्च मानी जाती है क्योंकि यह केवल एक शासन प्रणाली नहीं अपितु एक जीवंत सामाजिक व्यवस्था है जिसमें केवल सरकार ही नहीं बल्कि आम नागरिक की भी सक्रिय भूमिका रहती है। कोई भी लोकतंत्र तभी सफल कहा जाएगा जब सरकार की नीतियों और नागरिकों की जागरूकता एक साथ मिलकर इसकी जिम्मेदारी का निर्वहन करें।

आइए, समझते हैं कि लोकतंत्र में नागरिकों की क्या भूमिका हो सकती है? पहली यह कि लोकतंत्र निर्माण हेतु योग्य प्रतिनिधियों के चयन में सभी को सामान रूप से भाग लेना चाहिए। मतदान के प्रति जागरूक होना चाहिए और इसे कर्तव्य समझना चाहिए। अतः सभी नागरिक चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका यह कि संविधान के प्रति सम्मान रखना चाहिए। क़ानून का पालन करना चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि आपको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार और आपके अन्य मौलिक अधिकार बिना किसी रूकावट के प्राप्त होते रहें तो आपको नागरिक कानून तथा संविधान का पालन करना ही चाहिए। आपकी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता में एक जिम्मेदारी भी निहित है। एक लोकतान्त्रिक समाज की मुख्य पहचान हैं, अनुशासन एवं सामाजिक सद्भाव।

क्या केवल चुनाव के समय सक्रिय रहने से आपके कर्तव्य का पालन पूर्ण हो जाता है? नहीं! प्रत्येक नागरिक का सामाजिक और राजनितिक मुद्दों के प्रति सजग रहना भी नितांत आवश्यक है। सरकार की नीतियों, योजनाओं और निर्णयों पर रचनात्मक आलोचना और सुझाव देना भी आम नागरिक का दायित्व है। विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर, जनसभाओं और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से अपनी आवाज उठाना भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रजातंत्र में आम नागरिक की भूमिका सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र आदि के आधार पर भेदभाव करना सर्वथा अनुचित व्यव्हार है और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। आप एक आदर्श नागरिक हैं तो सभी के अधिकारों का सम्मान करें और समाज में एकता तथा भाईचारे को बढ़ावा दें। और हमें यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि विविधता में एकता भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश की विशेषता है, जिसे हम सभी को गौरवपूर्ण तरीके से निभाना चाहिए।

आज के डिजिटल युग में, जब सूचना पल भर में सम्पूर्ण विश्व में फ़ैल जाती है, तो ऐसे में यह नितांत आवश्यक है कि आम नागरिक सत्य और असत्य के बीच का भेद समझें तथा जिम्मेदारीपूर्वक सूचना का आदान प्रदान करें। अफवाह और भ्रामक समाचार लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसमें आपके परिवार को भी हानि हो सकती है। सोशल मीडिया के जागरूक प्रयोग से आप अनावश्यक खतरों से बच सकते हैं।

अंत में यही कहना है कि लोकतंत्र अधिकारों के उपभोग के साथ साथ कर्तव्यों के निर्वहन की सुचारु रूप से संचालित एक जीवंत कार्य प्रणाली है। सोच कर देखिए कि लोकतंत्र को कौन सशक्त बना सकता है? जो नागरिक जागरुक हैं, जिम्मेदार हैं, और सक्रिय हैं, वे ही देश के अन्य नागरिकों को सजग करने में महती भूमिका निभाते हैं। जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं, तब लोकतंत्र सुदृढ़, पारदर्शी और प्रभावी बनता है। इसलिए लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सरकार में नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों में निहित है।

-पूजा अनिल, स्पेन
हिंदी लेखिका और शिक्षिका

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

Bareilly News : बरेली के शेरगढ़ में अतिक्रमण हटाने के दौरान हंगामा, ईओ और दुकानदार के बीच हुई मारपीट।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: