केजरीवाल और राघव चड्ढा में बढ़ी दूरी
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राघव चड्ढा से क्यों रूठे केजरीवाल? AAP में छिड़ी ‘इनसाइड स्टोरी’
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां अब जगजाहिर हो गई हैं। आम आदमी पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। इस फैसले ने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
📌 न्यूज़ हाइलाइट्स:
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बड़ा एक्शन: राघव चड्ढा की छुट्टी, राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद छीना।
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दूरी की वजह: अरविंद केजरीवाल के शराब घोटाले में बरी होने के जश्न से गायब रहे चड्ढा।
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खत्म हुई चुप्पी: महीनों से चल रही अनबन की खबरों पर पार्टी के फैसले ने लगाई मुहर।
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बदले समीकरण: पार्टी के ‘ब्लू-आइड बॉय’ रहे राघव अब हाशिए पर?
केजरीवाल के जश्न से दूरी बनी गले की फांस
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा और पार्टी के बीच दरार तब गहरी हुई जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले के आरोपों से बरी होकर बाहर आए। पूरी पार्टी जश्न मना रही थी, लेकिन राघव चड्ढा की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया। पार्टी के भीतर इसे ‘अनुशासनहीनता’ और नेतृत्व के प्रति ‘उदासीनता’ के तौर पर देखा गया।
महीनों से चल रहा था सस्पेंस
पिछले कई महीनों से राघव चड्ढा न तो पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे थे और न ही उनके सोशल मीडिया हैंडल पर पहले जैसी सक्रियता दिख रही थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के रणनीतिक फैसलों और भविष्य की योजनाओ में चड्ढा की राय को तवज्जो न मिलना भी इस नाराजगी की एक बड़ी वजह हो सकती है।
क्या राघव चड्ढा की अहमियत कम हो रही है?
आम आदमी पार्टी में राघव चड्ढा का कद काफी तेजी से बढ़ा था। वे पंजाब चुनाव से लेकर राज्यसभा तक पार्टी का चेहरा रहे हैं। लेकिन अब डिप्टी लीडर के पद से हटाया जाना संकेत देता है कि ‘आप’ के भीतर शक्ति संतुलन (Power Balance) बदल रहा है। फिलहाल न तो राघव चड्ढा ने और न ही पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी कर नाराजगी की पुष्टि की है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

