UP में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सख्त निर्देश

विकास भी, विरासत भी: मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश—पर्यावरण की कीमत पर नहीं होगा इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की विकास नीति को लेकर एक बड़ा विजन साझा किया है। एनएचएआई (NHAI) की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश का बुनियादी ढांचा मजबूत करना अनिवार्य है, लेकिन यह पर्यावरण की बलि देकर नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सड़कों और पुलों के निर्माण के दौरान वृक्षों की कटान तभी की जाए जब वह पूरी तरह ‘अपरिहार्य’ हो। साथ ही, उन्होंने एक नया मानक तय करते हुए कहा कि जितने पेड़ कटेंगे, उससे कहीं अधिक संख्या में नए पौधे लगाना अनिवार्य होगा।


प्रमुख बिंदु: समीक्षा बैठक के मुख्य निर्णय

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलावार समीक्षा की और अधिकारियों को निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए:

  • पौधरोपण का महालक्ष्य: इस वर्ष उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • समीक्षा का त्रि-स्तरीय ढांचा: 1. जिलाधिकारी: हर हफ्ते (साप्ताहिक) परियोजनाओं की प्रगति देखेंगे। 2. मुख्य सचिव: हर 15 दिन (पाक्षिक) में कार्यों की बाधाओं को दूर करेंगे। 3. समन्वय: एनएचएआई और जिला प्रशासन के बीच ‘जीरो गैप’ कम्युनिकेशन होना चाहिए।

  • बिचौलियों पर लगाम: भूमि अधिग्रहण के मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि अधिकारी सीधे किसानों से संवाद करें। बिचौलियों का हस्तक्षेप किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बेहतर कनेक्टिविटी ही राज्य के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

“सड़क परियोजनाएं केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये यूपी की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। इनमें गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।”

किसानों के हितों की सुरक्षा

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मुआवजा वितरण और भूमि हस्तांतरण के दौरान किसानों के साथ सीधे संपर्क में रहें। इससे न केवल परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म होगी।


निष्कर्ष: योगी सरकार का यह संदेश साफ है—उत्तर प्रदेश अब एक ऐसी प्रगति की राह पर है जहाँ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘ग्रीन कवर’ (हरियाली) साथ-साथ चलेंगे।


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