SC : Reservation को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
आरक्षण (Reservation) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है:
धर्म परिवर्तन और आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
उच्चतम न्यायालय ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म से इस्लाम में धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति केवल धर्म बदलने के आधार पर पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता है।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह से सही ठहराया है, जिसमें धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों को जाति-आधारित आरक्षण का लाभ मिलने के दायरे से बाहर रखा गया था।
पीठ का निर्णय: यह फैसला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ द्वारा तमिलनाडु सरकार की उस अपील को खारिज करने के बाद आया है, जिसमें आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह दोहराया कि आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है, जो धर्म बदलने के बाद जातिगत प्रावधानों के तहत स्वतः लागू नहीं रहता।
हाल के अन्य चर्चित आरक्षण मामले (संदर्भ के लिए):
इसके अलावा देश में आरक्षण की सीमाओं और कोटे को लेकर अन्य अदालतों में भी बड़े फैसले आए हैं, जो चर्चा में हैं:
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कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला: हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी (SC) और एसटी (ST) का आरक्षण बढ़ाने वाले 2022 के उस कानून को असंवैधानिक करार दिया है, जिससे राज्य में कुल आरक्षण की सीमा 50% से बढ़कर 56% पहुंच रही थी। कोर्ट ने साफ किया कि इंद्रा साहनी मामले के तहत तय 50% की सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: मध्य प्रदेश में भी ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने के संशोधन और 50% की सीमा पार करने वाले प्रावधान को लेकर अदालत ने बड़ा फैसला देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
