SC : CJI सूर्यकांत का बड़ा फैसला, पायजामे की डोरी खोलना रेप की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को पलट दिया है, जिसमें पायजामे के नाड़े को ढीला करना अश्लील हरकत बताया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि पायजामे का नाड़ा खोलना या ढीला करना अश्लील हरकत नहीं, बल्कि रेप की कोशिश है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने यह फैसला सुनाया.
पायजामे का नाड़ा खोलना या ढीला करना अश्लील हरकत नहीं, बल्कि रेप की कोशिश है. यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने की है. जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि एक महिला को छूना और उसके पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश है. इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें इस अपराध को कोशिश नहीं बल्कि रेप करने की तैयारी कहा गया था, जिससे कम सजा मिलती है और इसे महिला की मर्यादा भंग करने की श्रेणी में रखा गया था. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने यह फैसला सुनाया.
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 को यह फैसला सुनाया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था ‘किसी पीड़िता के स्तनों को छूना या कपड़े की डोरी या नाड़ा खोलना रेप का अपराध नहीं माना सकता है. इसे यौन उत्पीड़न जरूर कहा जाएगा.’ तब से यह फैसला काफी विवादों में रहा था और सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ ‘वी द वीमेन’ की संस्थापक अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता के पत्र के बाद इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था. मंगलवार को सीजेआई यानी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत ‘बलात्कार के प्रयास’ का सख्त आरोप फिर से बहाल कर दिया.
दलील और फिर सीजेआई की टिप्पणी
टीओआई की खबर के मुताबिक, याचिकाकर्ता शोभा गुप्ता और सीनियर एडवोकेट एच एस फूलका की दलीलों का हवाला देते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘कोई भी जज या अदालत का फैसला तब तक पूरी तरह न्याय नहीं कर सकता, जब तक वह वादी की वास्तविक परिस्थितियों और अदालत तक पहुंचने में उनकी कमजोरियों को नहीं समझता.’ दलील में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर न्यायाधीशों से अधिक संवेदनशीलता की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
