रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 92.62 पर
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 92.62 के पार पहुँचा 📉
ईरान संघर्ष का भारतीय मुद्रा पर प्रहार
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान में चल रहे संघर्ष ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा है। शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.62 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर बंद हुआ।
प्रमुख आंकड़े और बाजार की स्थिति 📊
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नया रिकॉर्ड लो: ₹92.62 प्रति डॉलर (पिछले सप्ताह के ₹92.4750 के रिकॉर्ड को तोड़ा)।
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क्रूड ऑयल का असर: ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 40% की वृद्धि दर्ज की गई है।
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डॉलर इंडेक्स: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला इंडेक्स 0.03% बढ़कर 99.60 पर पहुँच गया है।
क्यों गिर रहा है रुपया? ⚖️
बाजार विशेषज्ञों और ट्रेजरी प्रमुखों के अनुसार, रुपये की गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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तेल कंपनियों की मांग: कच्चे तेल के महंगे होने से तेल कंपनियों को भुगतान के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ रही है।
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विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है (मंगलवार को करीब ₹4,741.22 करोड़ के शेयर बेचे)।
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आपूर्ति में बाधा: ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाएं दशकों की सबसे गंभीर आपूर्ति बाधा का सामना कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय: आगे और बढ़ सकती है मुश्किल 🔍
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो डॉलर की मांग और तेज होगी। ऐसी स्थिति में रुपया कमजोर होकर 94 से 95 के स्तर तक गिर सकता है। वर्तमान में रिजर्व बैंक (RBI) दखल देकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच दबाव कम नहीं हो रहा है।
मुख्य बिंदु:
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ब्रेंट क्रूड: वर्तमान में लगभग USD 102.0 प्रति बैरल पर कारोबार।
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अर्थव्यवस्था पर असर: आयात महंगा होने से देश में घरेलू महंगाई बढ़ने की आशंका।
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विदेशी मुद्रा भंडार: रुपये को बचाने के लिए आरबीआई की गतिविधियों पर बाजार की नजर।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

