राशन कार्ड: दिल्ली में 12 साल बाद बनेंगे!
🔴 दिल्ली में खाद्य सुरक्षा का बड़ा कदम: 12 साल बाद फिर बनेंगे नए राशन कार्ड! 2.89 लाख आवेदन लंबित
नई दिल्ली: दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने राजधानी के लाखों गरीब परिवारों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 12 साल से बंद पड़ी नए राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया जल्द ही फिर से शुरू की जाएगी। इस घोषणा के बाद 2.89 लाख लंबित आवेदकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने का रास्ता साफ हो गया है।
🧑💼 सीएम ने दिए सख्त निर्देश: खाद्य सुरक्षा में नहीं होगी देरी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत दिल्ली की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की गहन समीक्षा की गई।
सीएम ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि पात्र परिवार खाद्य सुरक्षा से वंचित न रहे, यह सरकार की प्राथमिकता है और नए राशन कार्ड जारी करने में अब और अधिक देरी नहीं की जाएगी।
🗑️ 2.5 लाख अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाए जाएंगे
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभाग बड़े पैमाने पर सत्यापन और सुधार अभियान चला रहा है। वर्तमान में 72.77 लाख लाभार्थी और 17.42 लाख राशन कार्ड सक्रिय हैं।
प्रस्तावित सुधारों के तहत, लगभग 2.5 लाख अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सूची में शामिल हैं:
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कर योग्य आय वाले लोग: 1,71,702 लाभार्थी (जिनकी आय टैक्स देने योग्य है)।
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डुप्लीकेट लाभार्थी: 80,103 नामों को हटाया जा सकता है।
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मृत्यु प्रमाणपत्र वाले लोग: सत्यापन के बाद 10,549 मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाएंगे।
✅ ई-केवाईसी अभियान होगा तेज
सीएम ने PDS को मजबूत बनाने के लिए ई-केवाईसी अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
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आधार मिलान: वर्तमान में 58 लाख से अधिक लाभार्थियों का आधार डेटा उपलब्ध है।
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स्थायी मान्यता: जिन लाभार्थियों का डेटा मिलान (नाम, जन्मतिथि, लिंग) 50 प्रतिशत से अधिक होगा, उनके रिकॉर्ड को स्थायी रूप से मान्य कर लिया जाएगा।
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जागरूकता: शेष लाभार्थियों के लिए एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश और उचित मूल्य की दुकानों (FPS) पर सूचना बोर्डों के माध्यम से एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि सभी पात्र लोग अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकें।
इस कदम से दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आए और केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत मुफ्त अनाज का लाभ मिल सके।
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