पुरानी कारें बनेंगी इलेक्ट्रिक, सब्सिडी
दिल्ली में पुरानी कारों और बाइकों की ‘बल्ले-बल्ले’: पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाने पर मिलेगी भारी सब्सिडी, जानें सरकार का नया प्लान
नई दिल्ली। दिल्ली के प्रदूषण को मात देने और पुराने वाहनों को कबाड़ (Scrap) होने से बचाने के लिए केजरीवाल सरकार एक क्रांतिकारी योजना पर काम कर रही है। दिल्ली की आगामी नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति के तहत, अब पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने (Retrofitting) के लिए सरकार सीधी सब्सिडी देने पर विचार कर रही है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन लाखों वाहनों को नया जीवन देना है, जिनकी निर्धारित उम्र पूरी हो चुकी है, लेकिन वे रेट्रोफिटिंग के जरिए दोबारा सड़क पर दौड़ सकते हैं।
50,000 वाहनों को मिलेगा लाभ, 5 करोड़ का बजट प्रस्तावित
सूत्रों के अनुसार, 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई ईवी नीति में रेट्रोफिटिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
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लक्ष्य: शुरुआती चरण में लगभग 50,000 वाहनों को इस योजना के दायरे में लाया जाएगा।
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बजट: दिल्ली सरकार ने इस विशेष सब्सिडी योजना के लिए 5 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट प्रस्तावित किया है।
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किन्हें मिलेगा फायदा: दो पहिया, तिपहिया और पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने वाली कंपनियों और वाहन स्वामियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
आधे दाम में तैयार हो जाएंगे इलेक्ट्रिक वाहन
रेट्रोफिटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी मिलने से जनता और कंपनियों दोनों को बड़ा आर्थिक फायदा होगा। उदाहरण के तौर पर:
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बसें: नई इलेक्ट्रिक बस जहां 1.80 करोड़ रुपये में आती है, वहीं पुरानी बस को रेट्रोफिट करने में करीब 70 लाख का खर्च आता है।
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ऑटो: नया इलेक्ट्रिक ऑटो 3 लाख में मिलता है, जबकि पुराने को इलेक्ट्रिक में बदलने का खर्च मात्र 1.5 से 1.75 लाख रुपये बैठता है।
क्यों अटकी थी अब तक यह योजना?
पूर्व में यह योजना इसलिए सफल नहीं हो पाई थी क्योंकि बिना सब्सिडी के रेट्रोफिटिंग का खर्च बहुत अधिक था, जिसके कारण कंपनियां आगे नहीं आ रही थीं। अब तेलंगाना और कर्नाटक की तर्ज पर दिल्ली सरकार भी सब्सिडी का कवच देकर कंपनियों को आकर्षित करने की तैयारी में है।
दिल्ली में वाहनों का गणित (2018 से अब तक)
दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए सख्त कदम उठा रही है, जिसका असर आंकड़ों में दिखता है:
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61 लाख: इतने वाहनों का पंजीकरण अब तक रद्द किया जा चुका है।
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8 लाख: वाहन NOC लेकर दूसरे राज्यों में जा चुके हैं।
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1.5 लाख: वाहन अब तक स्क्रैप (कबाड़) किए जा चुके हैं।
निष्कर्ष: प्रदूषण और जेब दोनों को राहत
अगर यह योजना धरातल पर उतरती है, तो दिल्लीवासियों को अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे सब्सिडी की मदद से उन्हें ‘ग्रीन व्हीकल’ में बदलकर प्रदूषण मुक्त दिल्ली में अपना योगदान दे सकेंगे।
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