प्राइवेट स्कूलों के लिए नई गाइडलाइंस
आरटीई: निजी स्कूलों को पोर्टल पर सीटें भरने का अंतिम अवसर, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
बिहार में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। शुक्रवार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक श्री विक्रम वीरकर की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्कूलों को कड़े निर्देश जारी किए गए।
13 अप्रैल तक का अल्टीमेटम
बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कमजोर और अलाभकारी समूह के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन की समीक्षा की गई।
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सख्त निर्देश: सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को 13 अप्रैल तक पोर्टल पर अपनी सीटों की संख्या अपडेट करनी होगी।
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कार्रवाई की चेतावनी: निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी साझा न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रस्वीकृति (मान्यता) की स्थिति
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नए स्कूल: 14 जनवरी से 08 अप्रैल के बीच आवेदन करने वाले 1949 स्कूलों को ऑनलाइन प्रस्वीकृति दी जा चुकी है।
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लंबित आवेदन: 90 दिनों से अधिक समय से लंबित 417 आवेदनों का निपटारा 30 अप्रैल तक करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि स्थल जांच और मानकों की पुष्टि के बाद ही फाइल आगे बढ़ाई जाए।
नामांकन का डेटा और निर्देश
प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने बताया कि रैंडमाइजेशन के जरिए 64,759 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए थे, जिनमें से 56,573 का नामांकन हो चुका है।
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लंबित नामांकन: 8,186 बच्चों का नामांकन अभी भी स्कूल स्तर पर अटका हुआ है।
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आदेश: स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे दूरी या अन्य छोटे कारणों से नामांकन रद्द न करें। केवल दस्तावेजों में गड़बड़ी या अभिभावक की असहमति पर ही नामांकन रोका जा सकता है।

200 करोड़ की प्रतिपूर्ति राशि जारी
सरकार ने निजी स्कूलों को बच्चों की फीस के बदले दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में तेजी दिखाई है:
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डीबीटी भुगतान: सत्र 2019-20 से 2023-24 तक के लिए कुल 200.71 करोड़ रुपये स्कूलों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
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अग्रणी जिले: अरवल, पूर्वी चम्पारण, रोहतास, सहरसा और शेखपुरा में शत-प्रतिशत राशि भेजी जा चुकी है। पटना और नालंदा जैसे जिलों में जांच रिपोर्ट मिलते ही शेष भुगतान कर दिया जाएगा।
तकनीकी सहायता के लिए बनेगा वीडियो
बैठक में यह बात सामने आई कि कई स्कूलों में भौतिक रूप से बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण वे पोर्टल पर ‘लंबित’ दिख रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा विभाग एक मार्गदर्शक वीडियो तैयार कर सभी स्कूलों को भेजेगा ताकि डेटा एंट्री में कोई त्रुटि न हो।
इस बैठक में उप निदेशक (प्राथमिक शिक्षा) श्रीमती उर्मिला कुमारी सहित समाज कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
(रिपोर्ट: जया कुमारी, पटना)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

