नेतन्याहू: ईरान से शांति, लेबनान से नहीं

नेतन्याहू का कड़ा रुख: ‘सीजफायर ईरान के साथ, लेबनान में हमले जारी रहेंगे’

यरूशलेम/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिवसीय युद्धविराम (Ceasefire) का इजरायल ने औपचारिक समर्थन तो किया है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। नेतन्याहू ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह समझौता केवल ईरान तक सीमित है और इसमें लेबनान (हिजबुल्लाह) शामिल नहीं है।


📌 नेतन्याहू के बयान की 3 बड़ी बातें:

  1. लेबनान पर कोई समझौता नहीं: इजरायली पीएमओ (PMO) ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के दावों के विपरीत, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई रुकने वाली नहीं है।

  2. शहबाज शरीफ के दावे का खंडन: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा था कि सीजफायर लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लागू होगा, जिसे नेतन्याहू ने सिरे से खारिज कर दिया।

  3. ईरान के परमाणु खतरे पर नजर: नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल, राष्ट्रपति ट्रंप के उन प्रयासों का समर्थन करता है जो ईरान को परमाणु और मिसाइल शक्ति बनने से रोकते हैं।


‘ऑपरेशन जारी रहेगा’: आईडीएफ का एक्शन

सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान के त्यार (Tyre) और शाब्रिया (Shabriha) जैसे इलाकों में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की। इजरायल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा उनकी उत्तरी सीमा से पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच सामंजस्य?

सूत्रों के अनुसार, सीजफायर से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर लंबी बात की थी। व्हाइट हाउस ने इजरायल को भरोसा दिलाया है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के दौरान इजरायल की सुरक्षा चिंताओं (विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद) को प्राथमिकता दी जाएगी।


विश्लेषण: दोधारी तलवार

नेतन्याहू का यह रुख दिखाता है कि वे ईरान के साथ सीधे युद्ध को तो फिलहाल टालना चाहते हैं, लेकिन वे ईरान के प्रॉक्सी (Proxy) संगठनों, विशेषकर हिजबुल्लाह को इस सीजफायर का लाभ नहीं उठाने देना चाहते। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में जारी युद्ध इस पूरे शांति प्रयास को खतरे में डाल सकता है।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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