MLA पेंशन विवाद: जनता के टैक्स पर रार
MLA Pension Controversy: एक बार बने विधायक और उम्र भर ‘ऐश’! जनता के टैक्स के पैसे पर नेताओं की भारी-भरकम पेंशन पर छिड़ी रार
न्यूज डेस्क: भारत में जहां एक तरफ पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारी सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के नेताओं को मिलने वाली ‘लाइफटाइम पेंशन’ पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक यह बहस तेज हो गई है कि आखिर जनता के टैक्स का पैसा नेताओं की पेंशन पर इस तरह क्यों लुटाया जा रहा है?
एक दिन के विधायक को भी ‘पेंशन की गारंटी’
हैरानी की बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ एक बार या कुछ ही समय के लिए भी विधायक (MLA) बन जाता है, तो वह जीवनभर पेंशन का हकदार हो जाता है। इतना ही नहीं, कई राज्यों में तो ‘जितनी बार विधायक, उतनी बार पेंशन’ का नियम भी चर्चा में रहता है (हालांकि पंजाब जैसे राज्यों ने इसे अब बदल दिया है)। आम आदमी जो अपनी पूरी जिंदगी काम करता है, उसे पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ता है, वहीं नेताओं के लिए नियम बिल्कुल अलग हैं।
टैक्सपेयर्स का पैसा: सुविधा या बर्बादी?
सोशल मीडिया पर ‘Public Tax’ की बर्बादी को लेकर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि:
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दोहरा मापदंड: सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘न्यू पेंशन स्कीम’ (NPS) और नेताओं के लिए शानदार पुरानी पेंशन जैसा फायदा क्यों?
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आर्थिक बोझ: देश के खजाने पर इन पूर्व विधायकों की पेंशन का सालाना बोझ करोड़ों-अरबों में होता है।
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सेवा या मेवा: राजनीति को जनसेवा कहा जाता है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भारी-भरकम वित्तीय लाभ इसे एक ‘मुनाफे वाला बिजनेस’ बना रहे हैं।
क्या बदल रहा है सिस्टम?
हाल ही में कुछ राज्यों में ‘एक विधायक-एक पेंशन’ (One MLA-One Pension) का कानून लाया गया है, ताकि एक से ज्यादा बार जीतने वाले नेताओं को कई सारी पेंशन न मिले। लेकिन जनता की मांग है कि इस सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल नेताओं की सुख-सुविधाओं के बजाय देश के विकास में हो।
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