कानपुर में 3.27 लाख मतदाता लापता
🚨 कानपुर मतदाता सूची में ‘महा-घपला’: 3.27 लाख ‘लापता’ और 1 लाख से अधिक ‘मृत’ मतदाता मिले; चुनाव आयोग ने शुरू की जाँच
कानपुर (उत्तर प्रदेश): चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान कानपुर जिले की मतदाता सूची में दशकों पुरानी अनियमितताओं का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सर्वे में पाया गया है कि जिले में 3.27 लाख मतदाता ‘लापता’ (अनट्रेसेबल) हैं, जबकि 1,02,391 मतदाताओं के मृत होने की पुष्टि हुई है।
इस बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी ने प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मचा दिया है और चुनाव आयोग (ECI) ने इन गंभीर अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है।
📉 9 लाख से अधिक नाम हटाने योग्य
जिले की 10 विधानसभा सीटों में कुल 35.38 लाख मतदाताओं में से 26.22 लाख फॉर्मों का सत्यापन किया गया। SIR की मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार, कुल 9,09,984 मतदाताओं को सूची से हटाने योग्य पाया गया है।
| कारण | संख्या | प्रतिशत |
| लापता (Un-traceable) | 3,27,271 | 36% |
| स्थायी रूप से स्थानांतरित | 3,87,096 | 42% |
| मृत | 1,02,391 | 11% |
| दोहरा पंजीकरण | 58,003 | 6% |
| कुल नाम हटाने योग्य | 9,09,984 | 100% |
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती 3,27,271 वे लोग हैं जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी; वे अपने पते पर नहीं मिले और न ही पड़ोसियों ने उनकी पुष्टि की। इन्हें ‘अनट्रेसेबल’ श्रेणी में रखा गया है।
👻 ‘भूत’ और ‘डुप्लीकेट’ मतदाताओं का जाल
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मृत मतदाता: 1 लाख से अधिक (1,02,391) लोगों के मृत होने की पुष्टि हुई है, जिनके नाम वर्षों से सूची में बने हुए थे।
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दोहरा पंजीकरण: 58,003 ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ मतदाता पहले से ही किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र या जिले की सूची में पंजीकृत थे।
अधिकारियों का मानना है कि यदि यह विशेष अभियान न चलाया जाता, तो लाखों ‘मृत’ या ‘निष्क्रिय’ मतदाता आगामी चुनावों में रिकॉर्ड का हिस्सा बने रहते, जिससे वास्तविक मतदान प्रतिशत का आकलन भी भ्रमित होता।
🏙️ शहरी क्षेत्रों में सर्वाधिक विसंगतियां
सर्वे में शहरी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं:
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किदवई नगर: यहाँ मृत मतदाताओं की संख्या 1.06 लाख तक पहुंच गई, जो जिले में सबसे अधिक है।
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कल्याणपुर: 57 हज़ार से अधिक मतदाता अपने घरों पर अनुपस्थित पाए गए।
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गोविंदनगर: 50 हज़ार से ज़्यादा मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह बस चुके हैं।
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महाराजपुर: यहाँ 1.60 लाख से अधिक लोगों का पलायन दर्ज किया गया, जो शिफ्टिंग (स्थानांतरण) का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
प्रशासन ने इन क्षेत्रों में जनसंख्या के घनेपन और तेज़ी से हो रहे आवासीय बदलावों को असंगतियों का मुख्य कारण बताया है।
🚜 ग्रामीण क्षेत्र भी प्रभावित
ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र भी इस समस्या से अछूते नहीं रहे हैं। बिल्हौर में 42,961 और घाटमपुर में 36 हज़ार से अधिक नाम काटने योग्य पाए गए हैं। यह दर्शाता है कि गांवों में भी मतदाता सूची का नियमित सत्यापन वर्षों से रुका हुआ था।
डॉ. विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त एवं राजस्व ने बताया कि वितरित किए गए सभी गणना पत्र वापस लेकर उन्हें अपलोड करने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से तारीख आगे बढ़ाने के फिलहाल कोई नए निर्देश नहीं मिले हैं।
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