जेपी ग्रुप: ₹10 हजार से अदाणी तक

इंजीनियर से अरबपति और फिर दिवालिया: जेपी ग्रुप के उत्थान और पतन की पूरी कहानी

नई दिल्ली: कॉर्पोरेट जगत में अर्श से फर्श तक पहुँचने की कहानियों में जयप्रकाश (JP) ग्रुप का नाम सबसे ऊपर आता है। उत्तर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कभी एकछत्र राज करने वाली यह कंपनी आज दिवालिया होने के बाद अदाणी ग्रुप (Adani Group) का हिस्सा बन चुकी है। इस साम्राज्य को खड़ा करने वाले शख्स थे जयप्रकाश गौड़, जिन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ मात्र ₹10,000 से अरबों का कारोबार खड़ा किया था।


📌 मुख्य बिंदु: जेपी ग्रुप का सफरनामा

  • शुरुआत: सिंचाई विभाग में 7 साल की इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ ₹10,000 से कंपनी की नींव रखी।

  • बड़ी उपलब्धियां: देश का पहला प्राइवेट एक्सप्रेसवे (यमुना एक्सप्रेसवे) और बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (F1 ट्रैक) बनाया।

  • पतन का कारण: 2008 की वैश्विक मंदी, रियल एस्टेट में भारी निवेश और ₹30,000 करोड़ से अधिक का कर्ज।

  • वर्तमान स्थिति: लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब गौतम अदाणी इस साम्राज्य के नए मालिक हैं।


सरकारी नौकरी से साम्राज्य तक का सफर

जयप्रकाश गौड़ ने उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में एक साधारण इंजीनियर के तौर पर करियर शुरू किया था। लेकिन कुछ बड़ा करने की चाहत में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स’ की शुरुआत की और देखते ही देखते सीमेंट, पावर, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में अपनी धाक जमा ली। 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे उनकी कंपनी की सबसे बड़ी पहचान बना।

कर्ज के भंवर में डूबा जेपी ग्रुप

कंपनी के पतन की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने भारी कर्ज लेकर कई बड़े प्रोजेक्ट्स एक साथ शुरू कर दिए। 2008 की आर्थिक मंदी ने रियल एस्टेट सेक्टर को तोड़ दिया, जिससे हजारों घर खरीदार (Homebuyers) सड़क पर आ गए। बैंकों का कर्ज बढ़ता गया और कंपनी दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया में चली गई।

अदाणी और वेदांता के बीच छिड़ी थी जंग

जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए भारत के दो दिग्गज उद्योगपति— गौतम अदाणी और अनिल अग्रवाल (वेदांता)— आमने-सामने थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। अंततः, कोर्ट ने अदाणी ग्रुप के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे जेपी ग्रुप की सीमेंट और अन्य संपत्तियों पर अब अदाणी का नियंत्रण हो गया है।

घर खरीदारों की जगी उम्मीद

अदाणी ग्रुप द्वारा अधिग्रहण के बाद, उन हजारों घर खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो सालों से जेपी विश टाउन और अन्य प्रोजेक्ट्स में अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। अदाणी के पास अब इस बिखरे हुए साम्राज्य को फिर से पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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