SC – Supreme Court of the United States के फैसले के बाद भी टैरिफ वापसी का रास्ता? समझिए ‘धारा 122’ और Donald Trump की रणनीति

अमेरिका में टैरिफ को लेकर एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि Supreme Court of the United States किसी विशेष कानूनी आधार पर लगाए गए टैरिफ को सीमित कर दे या उस पर सवाल खड़े कर दे, तो क्या राष्ट्रपति के पास कोई वैकल्पिक रास्ता बचता है? इसी संदर्भ में ‘धारा 122’ चर्चा के केंद्र में है।

क्या है ‘धारा 122’?

‘धारा 122’ अमेरिकी कानून Trade Act of 1974 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि यदि अमेरिका गंभीर भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) या आर्थिक असंतुलन का सामना कर रहा हो, तो वह अस्थायी रूप से आयात पर अतिरिक्त टैरिफ या कोटा लगा सकता है।

इस प्रावधान की मुख्य विशेषताएं:

  • राष्ट्रपति अधिकतम 150 दिनों तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगा सकते हैं।

  • इसका उद्देश्य व्यापार घाटा या विदेशी मुद्रा असंतुलन को नियंत्रित करना है।

  • यह आपात आर्थिक परिस्थिति में कार्यपालिका को त्वरित निर्णय की शक्ति देता है।

  • इसके बाद कांग्रेस की भूमिका और निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह क्यों अहम?

अमेरिका में पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाए गए हैं। यदि अदालत यह तय करती है कि किसी विशेष कानून का उपयोग सीमित या अनुचित था, तो राष्ट्रपति दूसरे कानूनी आधार—जैसे धारा 122—का सहारा ले सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • धारा 122 एक “बैकअप पावर” की तरह काम कर सकती है।

  • हालांकि यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन राजनीतिक संदेश देने के लिए पर्याप्त है।

  • इससे व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाया जा सकता है।

ट्रंप के लिए ‘आपदा में अवसर’ कैसे?

Donald Trump अपने कार्यकाल में चीन और अन्य देशों पर आक्रामक टैरिफ नीति के लिए जाने जाते रहे हैं। यदि अदालत किसी विशेष टैरिफ संरचना को सीमित करती है, तो धारा 122 जैसे प्रावधान उन्हें वैकल्पिक कानूनी रास्ता दे सकते हैं।

राजनीतिक दृष्टि से:

  • यह घरेलू उद्योगों के समर्थन का संदेश देता है।

  • चुनावी माहौल में “अमेरिका फर्स्ट” नीति को मजबूती मिलती है।

  • आर्थिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को फिर से जीवित किया जा सकता है।

क्या हैं सीमाएं?

हालांकि धारा 122 राष्ट्रपति को शक्ति देती है, लेकिन:

  • इसकी अवधि सीमित है।

  • इसे आर्थिक आपात स्थिति से जोड़ना होता है।

  • कांग्रेस और न्यायिक समीक्षा की संभावना बनी रहती है।

यानी यह पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि नियंत्रित और अस्थायी अधिकार है।

निष्कर्ष-

टैरिफ नीति केवल आर्थिक मसला नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति, घरेलू राजनीति और कानूनी व्याख्याओं का जटिल मिश्रण है। ‘धारा 122’ इसी जटिलता का एक अहम हिस्सा है, जो संकट की स्थिति में राष्ट्रपति को सीमित लेकिन प्रभावी हस्तक्षेप की शक्ति देता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी प्रशासन और अदालतों के बीच टैरिफ को लेकर शक्ति संतुलन किस दिशा में जाता है।

ब्यूरो रिपोर्ट,
आल राइट्स मैगज़ीन

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