Ind-Pak सीजफायर: भारत ने चीन को घेरा
भारत का चीन को करारा जवाब: ‘पाक के साथ सीजफायर में किसी का दखल नहीं’, ड्रैगन के मध्यस्थता वाले दावे की खुली पोल
नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना रुख साफ करते हुए चीन के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें बीजिंग ने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘युद्धविराम’ (Ceasefire) कराने का श्रेय लेने की कोशिश की थी। भारतीय सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाक मामलों में किसी भी ‘तीसरे पक्ष’ (Third Party) की भूमिका कभी स्वीकार्य नहीं रही है।
चीन के विदेश मंत्री का ‘झूठा’ दावा?
हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि चीन ने इस साल दुनिया के कई बड़े संघर्षों को सुलझाने में मध्यस्थता की है। वांग यी की सूची में ईरान परमाणु मुद्दा और इजरायल-फलस्तीन के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान तनाव का नाम भी शामिल था। चीन के इस दावे ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
सूत्रों का खुलासा: पाकिस्तान ने खुद गिड़गिड़ाकर मांगा था सीजफायर
भारतीय सूत्रों ने चीन के दावों की हवा निकालते हुए बताया कि मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम हमले के बाद पैदा हुए तनाव के दौरान कोई बिचौलिया नहीं था।
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DGMO स्तर की बातचीत: सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने खुद भारत के DGMO (Director General of Military Operations) से संपर्क कर सीजफायर का अनुरोध किया था।
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कोई तीसरा पक्ष नहीं: भारत ने हमेशा यह स्टैंड लिया है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय (Bilateral) हैं और इसमें चीन या अमेरिका जैसे किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं है।
ट्रंप के बाद अब चीन को लगा ‘क्रेडिट’ लेने का चस्का
यह पहली बार नहीं है जब किसी देश ने भारत-पाक के बीच मध्यस्थता का दावा किया हो। इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार संघर्ष विराम का श्रेय लेने की कोशिश कर चुके हैं। हालांकि, भारत ने हर बार यह साफ किया है कि 10 मई को हुआ युद्धविराम दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था।
“भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है—शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान के साथ हर विवाद को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के सुलझाया जाएगा।” — भारतीय कूटनीतिक सूत्र
चीन की ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन खुद को ग्लोबल पावर के रूप में स्थापित करने के लिए म्यांमार, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों के साथ भारत-पाक विवाद का नाम भी जोड़ रहा है। लेकिन भारत की कड़ी प्रतिक्रिया ने बीजing के इस प्रोपेगेंडा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर कर दिया है।
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