चंद्र ग्रहण 2026 : चांद कैसे हुआ खूनी लाल, जगुआर या राक्षस, ग्रहण की मान्यताओं में कौन था जिम्मेदार?

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चंद्र ग्रहण से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. इस घटना के दौरान चंद्रमा के गायब होने के लिए हमलावर राक्षसों, हत्यारे पालतू जानवरों और भूखे जगुआरों को दोषी ठहराया है. इसे हमेशा से ही एक चुनौती के रूप में देखा गया. जानिए, चंद्र ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं.

साल का पहला चंद्र ग्रहण आज लग रहा है. इसे ब्लड मून भी कहते हैं, जिसकी शुरुआत मंगलवार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा. हिन्दू धर्म में चंद्र ग्रहण सिर्फ एक भौगोलिक घटना नहीं बल्कि धार्मिक घटना है. दुनिया में कई देशों में चंद्र ग्रहण को लेकर जो मान्यताएं हैं वो बड़ी दिलचस्प हैं. दुनियाभर की संस्कृतियों ने चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा के गायब होने के लिए हमलावर राक्षसों, हत्यारे पालतू जानवरों और भूखे जगुआरों को दोषी ठहराया है.

कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित ग्रिफ़िथ वेधशाला के निदेशक ईसी क्रुप कहते हैं कि कई प्राचीन संस्कृतियों में सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण को सामान्य व्यवस्था के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाता था. मान्यता थी कि ऐसी चीजें हो रही हैं जो नहीं होनी चाहिए.

जगुआर ने चांद पर हमला करके निगल लिया!

चंद्र ग्रहण से जुड़ी जो मान्यता है उसमें यह भी कहा जाता है कि चांद पर जगुआर ने हमला किया और उसे निगल लिया है. यह मान्यता इंका लोगों के बीच बहुत पॉपुलर थी, ये लोग खासतौर पर पेरू, इक्वाडोर, बोलिविया, चिली और अर्जेंटीना तक फैले हुअए थे. यहां इंका साम्राज्य का शासन चलता था.

कैलिफोर्निया के लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी के शोधकर्ता डेविड डियरबोर्न कहते हैं, इंका लोगों ने खगोल विज्ञान पर काफी कुछ लिखा है. यहां के लोग ग्रहण को शुभ नहीं मानते थे. नई दुनिया में बसे स्पेनिश प्रवासियों द्वारा लिखे गए लेखों में ग्रहण से जुड़ी इंका प्रथाओं का जिक्र किया गया है.

उसी प्रथाओं में यह जिक्र मिलता है कि एक जगुआर ने चंद्रमा पर हमला करके उसे खा लिया था. इस विशाल जानवर के हमले से ही चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग अक्सर खून जैसा लाल हो गया था.

इंका लोगों को डर था कि चांद पर हमला करने के बाद जगुआर धरती पर आकर इंसानों को खा जाएगा. इसे रोकने के लिए, वे चांद की ओर भाले हिलाकर शोर मचाते थे. यहां तक कि अपने कुत्तों को पीटकर उन्हें भौंकने और चिल्लाने पर मजबूर करके भी, उस शिकारी को भगाने की कोशिश करते थे.

सात हमलावर राक्षस

क्रुप के मुताबिक, प्राचीन मेसोपोटामियाई लोग चंद्र ग्रहण को चंद्रमा पर हमले के रूप में भी देखते थे. उनकी कहानियों में, हमलावर सात राक्षस थे. मेसोपोटामिया की संस्कृति में राजा ही देश का प्रतिनिधित्व करता था, इसलिए लोग चंद्र ग्रहण को अपने राजा पर हमले के रूप में देखते थे. मेसोपोटामिया के लोगों में चंद्र ग्रहण की भविष्यवाणी करने की अच्छी क्षमता थी. इसलिए ग्रहण की आशंका में वे एक वैकल्पिक राजा नियुक्त कर देते थे, जो किसी भी हमले का सामना करने के लिए तैयार रहता था.

आम तौर पर, जिसे राजा घोषित किया जाता था, वह कोई ऐसा व्यक्ति होता था जिसे आसानी से हटाया जा सके. हालांकि वह व्यक्ति वास्तव में सत्ता में नहीं होता था, ग्रहण काल ​​के दौरान उसके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता था, जबकि असली राजा एक आम नागरिक का वेश धारण करता था. ग्रहण समाप्त होने के बाद वे राजा आमतौर पर गायब हो जाते थे और हो सकता है कि उन्हें जहर देकर मार दिया गया हो.

चांद को बचाने आती थीं पत्नियां

उत्तरी कैलिफ़ोर्निया की एक मूल अमेरिकी जनजाति हुपा में जो ग्रहण की कहानी प्रचलित है वो थोड़ी अलग है. क्रुप के अनुसार, हुपा जनजाति के लोग मानते थे कि चंद्रमा की 20 पत्नियां थीं और उसके पास बहुत सारे पालतू जानवर थे. इनमें से अधिकतर जानवर पहाड़ी शेर और सांप थे. जब चंद्रमा की तरफ से उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलता था तो वे उस पर हमला करके घायल कर देते थे.

क्रुप बताते हैं कि ग्रहण तब समाप्त होता था जब चंद्रमा की पत्नियां उसकी रक्षा करने आती थीं, खून इकट्ठा करती थीं और चांद को स्वस्थ कर देती थीं. दक्षिणी कैलिफोर्निया की लुइसेनो जनजाति के लिए ग्रहण इस बात का संकेत था कि चंद्रमा बीमार है. जनजाति के सदस्यों का काम था कि वे चंद्रमा को स्वस्थ करने के लिए मंत्र या प्रार्थना करें.

(ब्यूरो रिपोर्ट ऑल राइट्स मैगज़ीन)

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