गोपाल स्नैक्स का नया दांव-“छोटी भूख का बड़ा सॉल्यूशन” अभियान लॉन्च।

भारत में स्नैक्स सिर्फ़ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि हर दिन के छोटे-छोटे पलों की खुशियों का हिस्सा हैं। कभी चाय के साथ, कभी काम के बीच, तो कभी परिवार संग हल्की भूख मिटाने के लिए—स्नैक्स हमारे जीवन की रफ्तार से जुड़ चुके हैं। इसी भावनात्मक जुड़ाव को नई पहचान देते हुए गोपाल स्नैक्स ने अपने लोकप्रिय उत्पाद गाठिया के लिए “छोटी भूख का बड़ा सॉल्यूशन” नामक राष्ट्रीय प्रचार अभियान लॉन्च किया है, जो स्वाद, परंपरा और आधुनिक जीवनशैली का खूबसूरत संगम पेश करता है।
छोटी भूख का बड़ा सॉल्यूशन” अभियान के ज़रिए गोपाल स्नैक्स ने यह संदेश दिया है कि गाठिया केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि दिन के छोटे-छोटे ब्रेक्स को खास बनाने वाला स्वाद है। यह स्नैक्स युवा पीढ़ी की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, कामकाजी पेशेवरों के बीच के ठहराव और गृहिणियों के घरेलू पलों—हर जगह सहज रूप से फिट बैठता है।
अभियान की खास बात इसकी तीन फिल्में हैं, जो अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की ज़िंदगी के सच्चे और प्रासंगिक दृश्य दिखाती हैं। चाहे दोस्तों के साथ मस्ती का पल हो, ऑफिस में हल्की थकान का ब्रेक या घर में सुकून के कुछ लम्हे—हर कहानी गाठिया को एक भरोसेमंद साथी के रूप में प्रस्तुत करती है। इन फिल्मों को एक साझा गीत से जोड़ा गया है, जिसे हर दृश्य और मूड के अनुसार नए अंदाज़ में ढाला गया है, जिससे संदेश और भी गहराई से दिल तक पहुँचता है।
गोपाल स्नैक्स के सीईओ राज हदवाणी के अनुसार, यह अभियान कंपनी के लिए एक भावनात्मक और रणनीतिक मील का पत्थर है। गाठिया उनकी सफलता की नींव रहा है और अब उसे उसकी सही पहचान देने का समय आ गया है। उनका मानना है कि सादगी में ही सबसे बड़ी ताक़त होती है—और गाठिया उसी सादगी के साथ हर पीढ़ी, हर वर्ग और हर जीवनशैली को जोड़ता है।
इस अभियान का भव्य लॉन्च 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मंच पर होना, जहाँ गोपाल स्नैक्स आधिकारिक स्नैक्स पार्टनर रहा, इस बात का संकेत है कि ब्रांड अब राष्ट्रीय स्तर पर गाठिया को एक आइकॉनिक स्नैक्स के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। कुल मिलाकर, “छोटी भूख का बड़ा सॉल्यूशन” सिर्फ़ एक टैगलाइन नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से निकली एक सच्ची सोच है—जहाँ हर छोटी भूख के लिए गोपाल गाठिया एक बड़ा, भरोसेमंद और स्वाद से भरा जवाब बनकर सामने आता है। 
मुंबई,
अनिल बेदाग,

गोपाल चन्द्र अग्रवाल

सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

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