ED की बड़ी कार्रवाई: 400 करोड़ की संपत्ति जब्त
Jaypee Group Fraud: ईडी की बड़ी कार्रवाई, घर खरीदारों से ठगी मामले में ₹400 करोड़ की संपत्ति कुर्क
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी ग्रुप (Jaypee Group) के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली जोनल ऑफिस ने ‘जयप्रकाश सेवा संस्थान’ और ‘मेसर्स पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड’ की लगभग ₹400 करोड़ (बाजार मूल्य) की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई जयपी विशटाउन (Jaypee Wishtown) और जयपी ग्रीन्स प्रोजेक्ट (Jaypee Greens Project) के घर खरीदारों के साथ हुई धोखाधड़ी से जुड़ी है।
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फंड की हेराफेरी: जांच में सामने आया कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) ने 25,000 से ज्यादा घर खरीदारों से लगभग ₹14,599 करोड़ जुटाए थे।
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डायवर्जन: प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय, इस रकम का एक बड़ा हिस्सा ग्रुप की अन्य संस्थाओं जैसे ‘जयप्रकाश सेवा संस्थान’, ‘जयपी हेल्थकेयर लिमिटेड’ और ‘जयपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड’ में डाइवर्ट कर दिया गया।
मनोज गौड़ की मुख्य भूमिका और गिरफ्तारी
ईडी की जांच में जेपी ग्रुप के प्रमोटर मनोज गौड़ (Manoj Gaur) की केंद्रीय भूमिका उजागर हुई है।
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मनोज गौड़ ‘जयप्रकाश सेवा संस्थान’ के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं, जिसे डाइवर्ट किए गए फंड का हिस्सा मिला था।
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उन पर आरोप है कि उन्होंने फंड्स को हनी कटियाल के नियंत्रण वाली कंपनी ‘पेज 3 बिल्डटेक’ जैसी संस्थाओं में भी ट्रांसफर किया।
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इसी मामले में ईडी ने 13 नवंबर 2025 को मनोज गौड़ को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
छापेमारी में मिले थे अहम सबूत
इससे पहले 23 मई 2025 को ईडी ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई के 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए थे, जिनसे मनी लॉन्ड्रिंग और फंड की हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिले।
खरीदारों को न्याय की उम्मीद
दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर यह जांच शुरू की गई थी। हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन भर की कमाई इन प्रोजेक्ट्स में फंसी हुई है। ईडी की इस ताजा कार्रवाई से घर खरीदारों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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