ED ने ₹110 करोड़ के लोन फ्रॉड पर PC दर्ज की।
🏛️ ₹110.50 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में ED ने दायर की प्रॉसिक्यूशन शिकायत
भोपाल/इंदौर: प्रवर्तन निदेशालय (ED), भोपाल ज़ोनल ऑफिस ने मेसर्स नारायण निर्यात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कैलाश चंद्र गर्ग और 14 अन्य संबंधित संस्थाओं तथा व्यक्तियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत प्रॉसिक्यूशन शिकायत (PC) दायर की है।
ईडी ने यह शिकायत 17 नवंबर 2025 को माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), इंदौर के समक्ष दायर की थी, जिस पर न्यायालय ने 5 दिसंबर 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया।
🔎 जाँच का आधार
ईडी ने अपनी जाँच सीबीआई (AC-IV, व्यापम, भोपाल) द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने बाद में मेसर्स नारायण निर्यात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कई अन्य संबंधित संस्थाओं तथा व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र (Charge-sheet) दाखिल किया था।
💸 कैसे हुआ ₹110.50 करोड़ का फ्रॉड?
ईडी की जाँच में सामने आया कि कैलाश चंद्र गर्ग द्वारा नियंत्रित मेसर्स नारायण निर्यात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बैंकों के एक संघ (Consortium) से, जिसका नेतृत्व यूको बैंक कर रहा था, लेटर ऑफ क्रेडिट (LCs) और एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (EPC) के माध्यम से धोखाधड़ी करके लगभग ₹110.50 करोड़ का ऋण प्राप्त किया।
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भ्रामक उद्देश्य: हालाँकि इन फंडों को वैध व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के रूप में पेश किया गया था, लेकिन जाँच में स्थापित हुआ कि वास्तव में कोई वास्तविक खरीद या निर्यात नहीं किया गया था।
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फंड की हेराफेरी (Layering): इन फंडों को व्यापारिक गतिविधियों की झूठी उपस्थिति बनाने के लिए अंबिका सॉल्वैक्स लिमिटेड (Ambika Solvex Ltd.) के विभिन्न समूह संस्थाओं के माध्यम से चक्रीय लेनदेन (Circular Transactions) में घुमाया गया।
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अंतिम उपयोग: ऋण की राशि को बाद में व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट लाभ के लिए, जिसमें अचल संपत्तियों में निवेश और कैलाश चंद्र गर्ग द्वारा नियंत्रित संबंधित कंपनियों तथा फर्मों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से नकद निकासी शामिल थी, डायवर्ट किया गया। इस प्रकार, उन्होंने डायवर्ट किए गए धन को छिपाया और शोधित (laundered) किया।
🏛️ संपत्ति कुर्की
ईडी ने इस मामले में पहले ही दो अनंतिम कुर्की आदेश (Provisional Attachment Orders) जारी किए हैं, जिसके तहत ₹27.67 करोड़ मूल्य की 37 अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है।
मामले में आगे की जाँच जारी है।
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