ED: अवैध ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट

🚨 ईडी जांच के मुख्य निष्कर्ष

 

शीर्षक विवरण
तलाशी की तारीख 27 नवंबर, 2025
जांच का आधार मिजोरम पुलिस द्वारा NDPS अधिनियम की धारा 21(C)/25/29 के तहत दर्ज FIR.
जब्त नशीला पदार्थ (FIR) 4.724 किलोग्राम हेरोइन, जिसका मूल्य ₹1,41,66,000/- है।
तलाशी के स्थान मिजोरम (आइजोल, चम्फाई), असम (श्रीभूमि/करीमगंज), गुजरात (अहमदाबाद)।
जब्ती (तलाशी के दौरान) ₹46.7 लाख नकद, आपत्तिजनक सबूत, डिजिटल उपकरण, खातों की किताबें।
फ्रीज खाते 21 बैंक खाते (जैसा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है)।

⛓️ मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग नेटवर्क

 

जांच में भारत-म्यांमार सीमा के आर-पार संचालित एक सुनियोजित और जटिल नेटवर्क का खुलासा हुआ है:

पहलू विवरण
प्रीकर्सर की आपूर्ति गुजरात स्थित फर्म कृषिव एंटरप्राइजेज ने स्यूडोएफ़ेड्रिन टैबलेट और कैफीन एनहाइड्रस (मेथामफेटामाइन टैबलेट के निर्माण में प्रयुक्त प्री-प्रीकर्सर) ₹4.54 करोड़ मूल्य के मिजोरम स्थित फर्मों को आपूर्ति किए।
मिजोरम लिंकेज फर्मों के संबंध हेनरी लालबियाकज़िंगा, लालतलुआंगज़ेला, और बेंजामिन ललवम्पुई से थे, जो तस्करी और हवाला लेनदेन में शामिल थे।
हवाला और तस्करी ऑपरेटर अबू सालेह सैफ उद्दीन (असम), ज़ोडिंथारा, और लालरामपरी (चम्फाई, मिजोरम) जैसे आदतन अपराधी इन गतिविधियों को अंजाम देते थे।
शेल संस्थाएं (Shell Entities) मिजोरम स्थित फर्मों (जैसे बिल एंटरप्राइजेज, आरके टू सिस्टर्स स्टोर, एलएच फार्मेसी, केसी फार्मेसी) के वित्तीय संबंध कोलकाता स्थित शेल संस्थाओं, जिनमें महासिन ट्रेडकॉम (मोहम्मद ज़फ़र द्वारा प्रबंधित) शामिल है, से पाए गए।
ड्रग निर्माण मार्ग प्रीकर्सर भारत से म्यांमार ले जाए जाते थे, वहाँ Methamphetamine निर्मित होता था, और अंतिम उत्पाद मिजोरम के रास्ते भारत में वापस लाया जाता था।

💰 प्रमुख वित्तीय लेनदेन

 

  • अबू सालेह सैफ उद्दीन: इनके खातों में ₹11 करोड़ का विशाल क्रेडिट दर्ज किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल में नकद जमा भी शामिल है।

  • लालरामपरी (नारको हवाला ऑपरेटर): इनके बैंक खातों में ₹52.8 करोड़ का भारी क्रेडिट दर्ज किया गया, जिसमें असम, मिजोरम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली जैसे कई राज्यों में नकद जमा शामिल थे।

🚫 GST क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग

 

  • कार्यप्रणाली का खुलासा: जांच में पता चला है कि म्यांमार के नागरिकों द्वारा भारतीय नागरिकों से संबंधित जीएसटी क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया गया ताकि Methamphetamine टैबलेट के निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की खरीद को सुविधाजनक बनाया जा सके।

  • निष्कर्ष: भारतीय नागरिक म्यांमार के नागरिकों की ओर से प्रीकर्सर (स्यूडोएफ़ेड्रिन टैबलेट और कैफीन एनहाइड्रस) खरीदते थे, जिससे सीमा पार ड्रग उत्पादन और तस्करी नेटवर्क को बल मिलता था और इस प्रक्रिया में धन शोधन किया जाता था।


यह मामला दर्शाता है कि अवैध नशीले पदार्थों के लिए वित्तीय सहायता और आपूर्ति श्रृंखला भारत के विभिन्न राज्यों में फैली हुई है, और धन शोधन (Money Laundering) इन गतिविधियों को जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या आप इस मामले में शामिल धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) या NDPS अधिनियम के प्रावधानों के बारे में अधिक जानकारी चाहेंगे?


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