ड्रग/टेरर फंडिंग: ED ने चार्जशीट दाखिल की
⚖️ ED ने ड्रग तस्करी और टेरर फंडिंग मामले में अब्दुल मोमिन पीर और पत्नी के खिलाफ PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की
जम्मू/श्रीनगर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के श्रीनगर जोनल ऑफिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 25 नवंबर 2025 को अब्दुल मोमिन पीर और उनकी पत्नी सैयद सदाफ अंद्राबी के खिलाफ प्रिंसिपल एवं सेशंस जज (PMLA नामित विशेष न्यायालय), जम्मू की अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। सभी आरोपियों को 12 दिसंबर 2025 को अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
🔗 जांच का आधार: NDPS और UAPA
ED ने यह जांच मूल रूप से NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 82(1) के तहत हैंडवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR (संख्या 183/2020) के आधार पर शुरू की थी।
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NIA द्वारा अधिग्रहण: बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले को अपने हाथ में लिया और इसे ड्रग तस्करी/ट्रैफिकिंग और आतंकवाद फंडिंग से संबंधित गतिविधियों के लिए IPC, NDPS अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत पुन: पंजीकृत किया।
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अन्य आरोपी: NIA ने इस मामले में अब्दुल मोमिन पीर और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और पूरक चार्जशीट भी दाखिल की है।
💰 2.15 करोड़ की अवैध कमाई और अपराध की आय
ED की जांच में अब्दुल मोमिन पीर की ड्रग तस्करी में सक्रिय संलिप्तता का खुलासा हुआ:
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ड्रग डीलिंग: पीर को 2017 से जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दो बार नारकोटिक पदार्थों (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया गया है।
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अवैध कमाई: जांच से पता चला कि उसने तस्करी किए गए ड्रग्स (हेरोइन) बेचने और अन्य आरोपियों से परिवहन शुल्क के रूप में अपने बैंक खातों में लगभग ₹2.15 करोड़ की भारी राशि प्राप्त की।
🏠 अवैध धन से संपत्ति: मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ED ने पाया कि अब्दुल मोमिन पीर ने इस अवैध कमाई को वैध संपत्ति के रूप में दिखाने का प्रयास किया।
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संपत्ति खरीद: पीर ने इसी अपराध की आय (Proceeds of Crime) का उपयोग करके अपनी पत्नी सैयद सदाफ अंद्राबी के नाम पर श्रीनगर में ₹1.5 करोड़ में एक आवासीय संपत्ति (प्लॉट नंबर 79, HIG कॉलोनी, बेमिना) खरीदी।
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PMLA धारा 3: ED ने पाया कि दोनों आरोपी अब्दुल मोमिन पीर और सैयद सदाफ अंद्राबी POC (generation, possession, concealment, and use) से जुड़ी गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल थे और उन्होंने इसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की, इसलिए वे PMLA की धारा 3 के तहत दोषी हैं और धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।
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इससे पहले, ED ने उपर्युक्त ₹1.5 करोड़ की अचल संपत्ति के संबंध में कुर्की आदेश (Attachment Order) जारी किया था। आगे की जांच जारी है।
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