द्रौपदी मुर्मु: नालंदा विवि में संबोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को किया संबोधित: ज्ञान के पुनरुत्थान का बताया प्रतीक

राजगीर/पटना: भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) के भव्य दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक छात्रों को उपाधियाँ प्रदान कीं और एक प्रेरक संबोधन के माध्यम से नालंदा की गौरवशाली विरासत और उसके आधुनिक पुनरुत्थान पर प्रकाश डाला।

सभ्यतागत वादे की पुष्टि: ज्ञान और संवाद

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि आज का यह समारोह केवल डिग्री बांटने का उत्सव नहीं है, बल्कि एक “सभ्यतागत वादे” की पुष्टि है। यह वादा है कि ज्ञान हमेशा कायम रहेगा, संवाद की संस्कृति प्रबल रहेगी और शिक्षा निरंतर मानवता की सेवा करती रहेगी।

  • अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि स्नातक होने वाले छात्रों में आधे से अधिक 30 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, जो नालंदा के वैश्विक स्वरूप को दर्शाता है।


प्राचीन गौरव और आधुनिक पुनरुत्थान

राष्ट्रपति ने नालंदा के इतिहास को याद करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक विश्व का सबसे प्रतिष्ठित ज्ञान केंद्र था।

  1. विश्व के लिए क्षति: उन्होंने कहा कि प्राचीन नालंदा का पतन केवल भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति थी।

  2. राष्ट्रीय प्रतिबद्धता: आधुनिक नालंदा का पुनरुत्थान दूरदर्शी नेतृत्व और सहयोगी देशों के समन्वय का परिणाम है, जो साझा मूल्यों के आधार पर बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने का उदाहरण पेश करता है।

बौद्ध दर्शन का वैश्विक केंद्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने नालंदा विश्वविद्यालय से बौद्ध अध्ययन (Buddhist Studies) के क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा:

  • भारत का बौद्ध दर्शन और अभ्यास से गहरा संबंध है।

  • नालंदा को एशिया भर की विविध अभिव्यक्तियों से जुड़ते हुए अपनी सभ्यतागत नींव में निहित रहना चाहिए।

  • उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय एक बार फिर अपनी सदियों पुरानी भूमिका में लौटते हुए बौद्ध विद्वत्ता का अग्रणी वैश्विक केंद्र बनेगा।


विकसित भारत 2047 की दिशा में कदम

राष्ट्रपति ने कहा कि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियां थीं, जो ज्ञान का भंडार थीं। आज हम जो निर्माण कर रहे हैं, वह भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमिट विरासत बनेगा।

“भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, और इस यात्रा में नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान बौद्धिक और नैतिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।” — द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

समारोह के दौरान छात्रों में अपार उत्साह देखा गया। राष्ट्रपति ने छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई दी और उन्हें दृढ़ता, अनुशासन और बौद्धिक प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करने की प्रेरणा दी।


रिपोर्ट: सोनू कुमार, पत्रकार (बिहार)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: