TATA से छिनी डील, बेटी बनी बॉस!
World Water Day: 4 लाख से 7000 करोड़ तक, बिसलेरी के साम्राज्य की अनकही कहानी 💧
जब पानी बेचना माना जाता था ‘मजाक’
आज भारत में बोतलबंद पानी का मतलब ‘बिसलेरी’ बन चुका है, लेकिन इसकी शुरुआत संघर्षों भरी थी। 1969 में रमेश चौहान ने एक इतालवी ब्रांड ‘बिसलेरी’ को मात्र 4 लाख रुपये में खरीदा था। उस दौर में भारतीयों के लिए पानी खरीदकर पीना एक अजीब विचार था, लेकिन चौहान के विजन ने इसे भारत का नंबर-1 ब्रांड बना दिया।
बेटी जयंती ने रोकी 7000 करोड़ की डील 🛑
साल 2022 में एक वक्त ऐसा आया जब 82 वर्षीय रमेश चौहान अपने उत्तराधिकारी की कमी और स्वास्थ्य कारणों से बिसलेरी को टाटा ग्रुप को ₹7000 करोड़ में बेचने वाले थे। लेकिन उनकी बेटी जयंती चौहान ने इस डील का विरोध किया। उन्होंने अपने पिता को मनाया कि वे इस विरासत को परिवार के पास ही रखेंगे। जयंती के इस साहसी फैसले ने टाटा को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और आज वह खुद वाइस चेयरपर्सन के रूप में कंपनी का नेतृत्व कर रही हैं।
सॉफ्ट ड्रिंक के भी बेताज बादशाह रहे चौहान 🥤
बिसलेरी पर ध्यान केंद्रित करने से पहले, रमेश चौहान ने पारले ग्रुप के तहत भारतीय कोल्ड ड्रिंक मार्केट पर राज किया था:
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आइकॉनिक ब्रांड्स: थम्स अप, लिम्का, गोल्ड स्पॉट और माज़ा जैसे ब्रांड्स उन्होंने ही बनाए।
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बड़ी डील: 1993 में कोका-कोला की वापसी पर उन्होंने अपने सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो को करीब 400 करोड़ रुपये में बेच दिया था।
जल संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता 🌱
रमेश चौहान केवल पानी बेचते नहीं हैं, बल्कि उसे बचाने के लिए भी समर्पित हैं:
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चेक डैम: उन्होंने दक्षिण गुजरात में 46 चेक डैम बनवाए हैं, जो हर साल 10 बिलियन लीटर से अधिक पानी संचित करते हैं।
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वर्ल्ड रिकॉर्ड: 2015 में 8 घंटे में 1.1 मिलियन PET बोतलें इकट्ठा करने के लिए बिसलेरी का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
मार्केट लीडर: बिसलेरी का दबदबा 📊
भारत के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर मार्केट में बिसलेरी आज भी निर्विवाद रूप से सबसे आगे है:
| ब्रांड | मार्केट शेयर (%) | मालिक |
| बिसलेरी (Bisleri) | 36-38% | रमेश चौहान |
| किन्ले (Kinley) | 18-20% | कोका-कोला |
| एक्वाफिना (Aquafina) | 15% | पेप्सिको |
| अन्य (रेल नीर, बेली) | 27% | IRCTC व अन्य |
निष्कर्ष:
आज 42 वर्षीय जयंती चौहान के नेतृत्व में बिसलेरी न केवल पानी, बल्कि ‘लिमोनाटा’ और ‘स्पाइसी जीरा’ जैसे ड्रिंक्स के जरिए रिलायंस के ‘कैम्पा कोला’ और टाटा जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे रही है। यह कहानी साबित करती है कि सही विजन और अपनों के साथ से किसी भी व्यवसाय को अमर बनाया जा सकता है।
मुख्य जानकारी:
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स्थापना: 1969 (रमेश चौहान द्वारा अधिग्रहण)।
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वर्तमान नेतृत्व: जयंती चौहान (वाइस चेयरपर्सन)।
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नेटवर्थ: ₹7000 करोड़ से अधिक का साम्राज्य।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

