चंदौली: CM योगी और CJI ने रखा पत्थर

चंदौली से न्याय के नए युग का आगाज: CJI सूर्यकांत और CM योगी ने किया 6 जनपदों के ‘इंटीग्रेटेड कोर्ट’ का शिलान्यास, जानें क्या है इसकी खासियत

Chandauli News: उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। चंदौली की धरती पर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के छह जनपदों के लिए ‘एकीकृत न्यायालय परिसर’ (Integrated Court Complex) की आधारशिला रखी। 1500 करोड़ रुपये के इस महाप्रोजेक्ट के जरिए यूपी अब देश के लिए ‘ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर’ का नया बेंचमार्क बनेगा।

एक छत के नीचे मिलेगा न्याय: क्या है इंटीग्रेटेड मॉडल?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के 10 जनपदों को चुना गया है। शनिवार को चंदौली सहित 6 जनपदों के लिए भूमिपूजन कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • लागत: चंदौली परिसर का निर्माण 286 करोड़ रुपये की लागत से होगा, जबकि कुल योजना 1500 करोड़ की है।

  • समय सीमा: अप्रैल 2027 तक यह भव्य परिसर बनकर तैयार हो जाएगा।

  • निर्माण संस्था: विश्वप्रसिद्ध कंपनी L&T (एलएंडटी) इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

  • क्षेत्रफल: अकेले चंदौली का कोर्ट परिसर लगभग 35 बीघे में फैला होगा।


CJI सूर्यकांत: “यूपी बनेगा देश के लिए उदाहरण”

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे CJI सूर्यकांत ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस विजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एकीकृत कोर्ट परिसर आम आदमी के संवैधानिक सपनों को साकार करने जैसा है।

CJI के महत्वपूर्ण सुझाव:

  1. महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग भवन: उन्होंने सीएम योगी से विशेष रूप से महिला वकीलों के लिए अलग स्पेस बनाने का आग्रह किया।

  2. हेल्थ सेंटर: कोर्ट परिसर में ही एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने का सुझाव दिया, जिससे बुजुर्गों और अधिवक्ताओं को आपातकालीन चिकित्सा मिल सके।

  3. नेशनल बेंचमार्क: CJI ने कहा कि वे दूसरे राज्यों में जाकर यूपी के इस आधुनिक न्यायिक ढांचे का उदाहरण देंगे।


CM योगी का विजन: “न्याय के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा”

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अक्सर वादकारियों को एक काम के लिए कचहरी के अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इंटीग्रेटेड मॉडल से:

  • सारी सुविधाएं एक साथ: जज के आवास, अधिवक्ताओं के चैंबर, कैंटीन, और कोर्ट रूम एक ही सुरक्षित परिसर में होंगे।

  • पायलट प्रोजेक्ट: शामली, औरैया, हाथरस, महोबा और अमेठी के बाद अब चंदौली समेत अन्य जिलों में भी यह काम तेजी से बढ़ेगा।

  • धन की कोई कमी नहीं: सीएम ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को आधुनिक बनाने के लिए बजट की कोई बाधा नहीं आएगी।


आम जनता और अधिवक्ताओं को क्या मिलेगा?

न्यायालय का जो मॉडल सामने आया है, वह किसी कॉर्पोरेट हब से कम नहीं है। इसमें:

  • अत्याधुनिक सुविधाएं: पार्क, फूड कोर्ट, और मल्टी-लेवल पार्किंग।

  • समय की बचत: अलग-अलग लोकेशंस की जगह एक ही परिसर होने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।

  • सुरक्षा: जजों के आवास परिसर के भीतर होने से उनकी सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

निष्कर्ष: चंदौली में हुआ यह आयोजन केवल ईंट-पत्थर की इमारत का शिलान्यास नहीं है, बल्कि यह यूपी में ‘सुलभ और त्वरित न्याय’ की दिशा में एक बड़ा संकल्प है।


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